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15 अगस्त पर हो सकता है फिदायनी हमला, हाई अलर्ट जारी

हमला करके पीओके में बैठे आतंकी अपने नापाक इरादों की गूंज सीधे दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।

15 अगस्त पर हो सकता है फिदायनी हमला, हाई अलर्ट जारी

जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) लांघकर सूबे में आतंक का खूनी खेल खेलने के इरादे से की गई लश्करे तैयबा के आतंकियों की घुसपैठ आने वाले दिनों में फिदायीन हमलों और सशस्त्र बलों पर घात लगाकर हमला करने की घटनाओं में तब्दील हो सकती है।

देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया ब्यूरो इस बात के अर्लट जारी कर रहे हैं, जिसमें उनका कहना है कि आतंकवादियों की यह नई रणनीति 15 अगस्त को देश की आजादी के जश्न में विध्न डालने के अलावा बीते काफी समय से प्रदेश में तैनात सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए अभियानों में मारे जा रहे बड़े आतंकियों की वजह से पीओके में बैठे आतंक के आकाओं में पैदा हो रहे तनाव की परिणति हो सकती है।

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इसके लिए आने वाले दिनों में सीमापार से घुसपैठ की घटनाओं में इजाफा देखने को मिल सकता है। इसमें लश्कर के आका अपने आतंकियों को सूबे में दस्तक देते ही फिदायीन हमला करने की मानसिकता के साथ ट्रेनिंग देकर भेजेंगे। इसके पीछे एक कारण भारत में आजादी के पर्व की नजदीकी के दौरान ऐसा हमला करके पीओके में बैठे आतंकी अपने नापाक इरादों की गूंज सीधे दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।

उत्तरी-कश्मीर में छिपकर बैठे हैं आतंकी

रक्षा मंत्रालय व खुफिया ब्यूरो के सूत्रों का कहना है कि सेना व अन्य बलों के केंद्र में सीमापार घुसपैठ रोकने के अलावा उत्तरी-कश्मीर के वो खास इलाके हैं। जिसका एलओसी से घुसपैठ करने के बाद लश्कर के अधिकतर विदेशी आतंकी सुरक्षित पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें सोपोर, लोलाब, पट्टनपलालन, हंडवाड़ा और हाजन मुख्य रूप से शामिल हैं। आंकड़ों के हिसाब से यहां अभी भी 80 से 90 विदेशी आतंकी मौजूद हैं।

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आतंकियों के जमावड़े ने बढ़ायी चुनौती

दक्षिणी-कश्मीर में चलाए गए तेज सैन्य अभियानों में सुरक्षा बलों को काफी समय से कामयाबी मिल रही है। अब तक 41 आतंकी मारे जा चुके हैं। जिसके परिणामस्वरूप सैन्यबलों का हौसला बुलंद है।

लेकिन उत्तरी-कश्मीर में आतंकियों के जमावड़े और उनके बाहर निकलकर कोई गतिविधि न करने से सैन्य अभियानों की धीमी पड़ी रफ्तार सुरक्षाबलों के लिए चुनौती पेश कर रही है।

इसे दूर करने और आतंकियों को उनकी मांद से बाहर निकालने के लिए सैन्यबल उत्तरी-कश्मीर में अपना मूवमेंट तेज करेंगे, इलाकों की निगरानी बढ़ायी जाएगी, सर्च अभियान तेज किए जाएंगे, ओवर ग्राउंड वर्कर्स के नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।

शनिवार को सशस्त्र बलों ने अपने इस नई रणनीति का आगाज खुफिया इनपुट के आधार पर सोपोर में सेना के गश्ती दल पर हमला करने आए लश्कर के तीन आतंकियों को ढेर करके कर दिया है।

सोपोर, शोपियां में शुरू हुए सेब के सीजन की वजह से भी आतंकियों की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ेंगी। क्योंकि इस दौरान यहां के लोग आतंकियों की मदद के बजाय अपनी कमाई के मुख्य व्यवसाय पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

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बदली हुई सोच देती स्थायित्व

सेना के एक सूत्र ने कहा कि एलओसी से जब आतंकी ट्रेनिंग लेते हैं। तब उन्हें उनके आकाओं द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर एक झूठी तस्वीर बतायी जाती है। इसमें कहा जाता है कि वहां भारत की सरकार व सेना आम कश्मीरी आवाम की आजादी की आवाज को बंदूक की नोक पर दबा रही है।

इससे उद्वेलित होकर आतंकी जंग-ए-आजादी के झांसे में फंसकर तैश में आकर एलओसी लांघते हैं और फिदायीन बनकर अपनी जिदंगी तबाह कर लेते हैं। लेकिन जो आतंकी उत्तरी-कश्मीर में डेरा डाले हुए हैं।

उनके जैसे कई आतंकियों का मानसपटल यहां लोगों की अच्छी जिदंगी देखकर तुरंत बदल जाता है और उन्हें अपने आकाओं की बतायी हुई कहानी झूठी लगने लगती है। उनकी यही बदली हुई सोच उन्हें स्थायित्व प्रदान करती है। लेकिन सशस्त्र बल जल्द ही इस स्थायित्व की काट करके आतंकियों को उनकी सही जगह पहुंचाने के लिए तैयार हैं।

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