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बहावलपुर का इतिहास: आतंकवाद की नर्सरी और जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर की जन्म कुंडली

बहावलपुर से चल रही आतंकवाद की नर्सरी इन दिनों खूब चर्चा में है। वहां स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय इस समय पाक पंजाब सरकार के कब्जे में है। इस कार्यवाई के दो मकसद हो सकते हैं। पहला यह कि पूरे विश्व को बताया जा सके कि पाक स्वयं अपने स्तर पर आतंकी संगठनों पर नकेल कस रहा है। दूसरा, यह कि यदि भारत जैश के इस मुख्यालय पर कोई सर्जिकल हमला करे तो वहां मौजूद लोगों व आतंकी नेताओं को बचाया जा सके।

बहावलपुर का इतिहास: आतंकवाद की नर्सरी और जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर की जन्म कुंडली

बहावलपुर से चल रही आतंकवाद की नर्सरी इन दिनों खूब चर्चा में है। वहां स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय इस समय पाक पंजाब सरकार के कब्जे में है। इस कार्यवाई के दो मकसद हो सकते हैं। पहला यह कि पूरे विश्व को बताया जा सके कि पाक स्वयं अपने स्तर पर आतंकी संगठनों पर नकेल कस रहा है। दूसरा, यह कि यदि भारत जैश के इस मुख्यालय पर कोई सर्जिकल हमला करे तो वहां मौजूद लोगों व आतंकी नेताओं को बचाया जा सके। यह तो चर्चा है ही कि पुलवामा हमले के बाद बहावलपुर, मुख्य आतंकी ठिकाने के रूप में मीडिया व सैन्य रणनीतिकारों के रडार पर है। जिस मुल्तानी संस्कृति व भाषा को प्यार करने वाले लगभग एक करोड़ लोग भारत में रहते हैं, उसी संस्कृति के केंद्र मुल्तान व बहावलपुर अब पाकिस्तानी आतंकवादियों का अड्डा बन गए हैं।

जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय

जैश-ए-मोहम्मद के तार अलकायदा से भी जुड़े रहे हैं और तालिबान से भी। बहावलपुर में 6.5 एकड़ जमीन में फैला है इसका मुख्यालय। इसमें एक स्विमिंग पूल भी है और अस्तबल भी, जिसमें अच्छी नस्लों के दर्जनभर घोड़े रखे गए हैं। स्विमिंग पूल व घोड़ा-अस्तबल का प्रयोग भी आतंकी प्रशिक्षण के लिए है। जैश वाले शहर के बीचोंबीच एक मदरसा भी चलाते हैं। इस मदरसे में 70 अध्यापक हैं और 900 बच्चे पढ़ते हैं। इसे जैश की नर्सरी माना जाता है।

बहावलपुर से पाक नेशनल असेंबली

ऐसा नहीं कि इस संगठन को पाकिस्तान में व्यापक समर्थन प्राप्त है। बहावलपुर से पाक नेशनल असेंबली के सदस्य रियाज हुसैन पीरज़ादा भी इस मदरसे के विरोधी हैं। उनका आरोप है कि पाबंदियों के बावजूद इस संगठन को अभी भी आईएसआई व सेना के कुछ संगठनों की ओर से मदद मिलती है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने अपने कार्यकाल के मध्य इस संगठन के खिलाफ कार्यवाई के आदेश भी दिए थे।

जैश का मुखपत्र अलकलाम

मसूद अजहर पहले हरकत-उल-अंसार का नेता था। उसकी सारी ट्रेनिंग तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर की देखरेख में हुई। वह सोमालिया, केंद्रीय एशिया व चेचन्या में भी हरकत उल अंसार की गतिविधियां चलाता रहा है। शहर के मॉडल टाउन क्षेत्र में कंक्रीट से बनी एक बहुमंजिला इमारत से चलता है मौलाना मसूद अजहर का जैश मुख्यालय। यहां आईटी का आधुनिकतम मीडिया तंत्र भी है और यहीं से छपता है जैश का मुखपत्र अलकलाम।

मसूद अजहर की जन्म कुंडली

इस अखबार में मसूद अजहर ‘सईदी’ के नाम से लिखता है। 4.51 किलोमीटर तक फैले इस शहर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है। बहावलपुर में आतंक की नर्सरी चलाने वाला मसूद अजहर इसी शहर में 10 जुलाई, 1968 को पैदा हुआ। उसके पिता अल्लाह बख्श सरकारी स्कूल में मुख्याध्यापक थे। 11 बच्चों वाला यह परिवार डेयरी फार्म व पोल्ट्री फार्म का धंधा भी करता था।

सावते काश्मीर का एडीटर बना

कराची के जामिया उलूम-उल इस्लामिया में शिक्षा प्राप्ति के दौरान ही अजहर हरकत-उल-अंसार में शामिल हो गया था। सोवियत-अफ़गान युद्ध में घायल होने के बाद उसे हरकत के दो मुखपत्रों सईदे-मुजाहिद्दीन और सावते काश्मीर का एडीटर बना दिया गया। कुछ माह बाद ही वह हरकत का जनरल सेक्रेटरी बन गया और धन संग्रह का काम उसके जिम्मे आया।

मसूद अजहर की रिहाई

1994 में यह शख्स हरकत-उल-अंसार के दो गुटों में समझौता करने के मकसद से श्रीनगर आया, जहां उसे फ़रवरी 94 में गिरफ्तार कर लिया गया। 1995 में एक बार उसके कुछ समर्थकों ने विदेशी पर्यटकों का अपहरण किया और उनकी रिहाई के बदले में अज़हर की रिहाई की शर्त रखी। सही वक्त पर रिहाई न होने के कारण एक को छोड़ शेष सभी विदेशी पर्यटक मार डाले गए थे।

कंधार कांड

दिसम्बर 1999 में जब इंडियन एयरलाइंस 814 का अपहरण हुआ तो उस वक्त अपहरणकर्ताओं की शर्त पर अजहर को कंधार में लाकर रिहाकर दिया गया। अपहरणकर्ताओं में अजहर का भाई इब्राहीम अजहर भी शामिल था। अजहर को भारतीय संसद पर हमले के समय भी पाकिस्तान की सरकार ने नजरबंद किया था, मगर लाहौर हाईकोर्ट के एक फैसले के तहत उसे रिहा कर दिया गया।

बहावलपुर भवन

अब अमेरिकी दबाव के बावजूद उसके विरुद्ध कार्यवाही पर संशय की स्थिति बरकरार है। पूरे भारत में लगभग पचास भवन हैं जो इसी बहावलपुर का नाम अपने साथ चस्पां रखते हैं। अकेले पंजाब-हरियाण में ही 35 के लगभग शहरों व कस्बों में बहावलपुर से विभाजन के समय इधर यानि भारत में आए लोगों ने बहावलपुर भवन बनाए हैं।

हिन्दी-मुल्तानी शब्दकोष

यद्यपि बहावलपुरी या मुल्तानी भाषा अथवा सरायकी को भारत में कहीं भी कोई सरकारी या अर्द्ध सरकारी मान्यता प्राप्त नहीं है, फिर भी यहां पर मुल्तानी भाषा में साहित्य रचा जाता है। पत्र-पत्रिकाएं छपती हैं। दिल्ली में ही बसे एक विद्वान शायर डॉ. राणा गन्नौरी ने तो पूरा-पूरा हिन्दी-मुल्तानी शब्दकोष भी तैयार किया है। कुरुक्षेत्र में गत दिवस एक साहित्यिक समारोह भी आयोजित हुआ था जिसमें शामिल साहित्यकारों को मुल्तान-जादे के नाम से मान पत्र भी दिए गए थे।

बहावलपुर में आतंकवाद की नर्सरी

इस सम्मेलन में शर्त यह भी थी कि सभी साहित्यकार सिर्फ मुल्तानी-बहावलपुरी भाषा में ही श्रोताओं से मुखातिब होंगे। बहावलपुर व मुल्तान को याद करते हुए पंजाब-हरियाणा व यूपी के लाखों बुजुर्गों की आंखें अब भी नम हो जाती हैं। कभी मीठे पानी, लहलहाते खेतों, रसदार फलों, व गेहूं की लहलहाती फसलों के लिए लोकप्रिय बहावलपुर में अब आतंक की खेती हो रही है।

विभाजन के बाद भी पांच साल तक बहावलपुर

1802 में नवाब मुहम्मद बहावल खान द्वितीय द्वारा बसाए गए इसी शहर में 22 फरवरी, 1833 को नवाब व अंग्रेजों के मध्य संधि हुई, इसे स्वतंत्र स्टेट का दर्जा दिया गया। विभाजन के बाद भी पांच साल तक बहावलपुर स्वतंत्र ‘स्टेट’ बना रहा है। 1952 में इसे पाक में विलीन कर दिया गया। बहावलपुर का सोलर-पार्क काफी प्रसिद्ध है। जिन्ना के नाम पर बन रहा यह पार्क इसी वर्ष पूरा हो रहा है। मिठासभरी बोली वाले शहर में जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय होना अजब लगता है।

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