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एनआईए का दावा, टेरर फंडिंग के मामले में दोषियों को सजा दिलाने में मददगार होंगे चार्ली, अल्फा और गामा

एनआईए ने कश्मीर घाटी में देश विरोधी गतिविधियों के लिए पैसे मुहैया कराने के मामले में लश्कर- ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद सहित12 लोगों के खिलाफ एक अदालत में आरोप-पत्र किया है जिसमें चार्ली, रोमियो, अल्फा, गामा एवं चार अन्य के इकबालिया बयान दर्ज हैं।

एनआईए का दावा, टेरर फंडिंग के मामले में दोषियों को सजा दिलाने में मददगार होंगे चार्ली, अल्फा और गामा

चार्ली, रोमियो, अल्फा और गामा-ये किसी फिल्म या उपन्यास के किरदारों के नाम नहीं बल्कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से एक केस की छानबीन के दौरान इकबालिया बयान देने वालों के कूट नाम (कोड नेम) हैं।

दरअसल, एनआईए ने कश्मीर घाटी में देश विरोधी गतिविधियों के लिए पैसे मुहैया कराने के मामले में लश्कर- ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद सहित12 लोगों के खिलाफ एक अदालत में आरोप-पत्र किया है जिसमें चार्ली, रोमियो, अल्फा, गामा एवं चार अन्य के इकबालिया बयान दर्ज हैं।

इस साल 18 जनवरी को आरोप- पत्र दायर करते वक्त एनआईए ने आठ इकबालिया बयानों को जोड़ दिया और ये इकबालिया बयान देने वालों का कूट नाम( कोड नेमत्र) चार्ली, रोमियो, अल्फा, पॉटर, पाइ, हैरी और गामा रखा। एक अज्ञात व्यक्ति ने भी इकबालिया बयान दिया है।

एनआईए अधिकारियों का मानना है कि दर्ज किए गए इकबालिया बयानों से इस मामले में दोषियों को सजा दिलाने में काफी मदद मिल सकती है।

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बीते साल 30 मई को कश्मीर घाटी में अलगाववादियों के खिलाफ केस दर्ज करने वाली एनआईए ने कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण से जुड़े मामले में आरोपी आठ लोगों से इस बाबत इकबालिया बयान हासिल करने में कामयाबी पाई कि पैसे कहां से आए और कहां को गए।

इकबालिया बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किया जाता है। आरोपियों ने इसमें पुष्टि की है कि वे किसी जांच एजेंसी के दबाव में आए बगैर बयान दे रहे हैं।

पिछले साल आरोपी जब इकबालिया बयान दर्ज करा रहे थे, उस वक्त पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई और कार्यवाही के दौरान अदालत परिसर में कोई जांच अधिकारी मौजूद नहीं था। बाद में ये आरोपी यदि अपने बयान से मुकर जाते हैं तो एनआईए उन पर झूठी गवाही देने का केस दाखिल कर सकती है।

अधिकारियों ने अपने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाने का मकसद उन अलगाववादियों के खिलाफ केस को पुख्ता बनाना है जिन्होंने कथित तौर पर पत्थरबाजों को पैसे मुहैया कराए और घाटी में अशांति फैलाई।

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इस मामले में एनआईए के गवाहों में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का बेटा नईम- उल- जफर गिलानी और गिरफ्तार किए गए कारोबारी जहूर अहमद शाह वटाली का बेटा यासिर गफ्फार शाह शामिल है।

नईम- उल- जफर ने चार पन्नों का बयान दिया जबकि यासिर ने एनआईए को आठ पन्नों का बयान दिया। दोनों को सरकारी गवाह बनाया गया है।

इस मामले में10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी एनआईए ने हाफिज सईद और आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन सहित12 लोगों के खिलाफ आरोप- पत्र दायर किया है। सईद और सलाहुद्दीन पाकिस्तान में हैं।

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आरोप-पत्र में 232 लोगों की सूची में 42 संरक्षित गवाहों के भी नाम दिए गए हैं जिनका परीक्षण कार्यवाही के दौरान किया जाएगा। गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून की धारा 43 (3) के तहत गवाहों को संरक्षित किया गया है।

इसके तहत अदालती कार्यवाहियों के दौरान व्यक्ति के नाम और पते का जिक्र नहीं किया जाता है। ये 42 संरक्षित गवाह एनआईए कानून की धारा17 के दायरे में भी आते हैं जिसमें कार्यवाहियां बंद कमरे में संचालित करने का प्रावधान है।

एनआईए ने इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह, वटाली, गिलानी के करीबी सहयोगी अयाज अकबर (कट्टरपंथी अलगाववादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत का प्रवक्ता), पीर सैफुल्ला, शाहिद- उल- इस्लाम (हुर्रियत कांग्रेस के नरमपंथी धड़े का प्रवक्ता), मेहराजुद्दीन कलवाल, नईम खान, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, फोटो- पत्रकार कामरान यूसुफ और जावेद अहमद भट शामिल हैं।

इनपुट- भाषा

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