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इन 6 लोगों की टीम ने सीक्रेट तरीके से किया था नोटबंदी का काम

मोदी के भरोसेमंद अधिकारी अधिया और 5 अन्य लोगों को इस सीक्रेट प्लान के बारे में जानकारी थी।

इन 6 लोगों की टीम ने सीक्रेट तरीके से किया था नोटबंदी का काम
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबैन के फैसले को गुप्त रखना और उसे उसके निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने में एक छोटी सी टीम ने काम किया है। आज हर कोई जानना चाहता है कि कैसे इस फैसले को गुप्त रख पीएम मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का फैसला कर दिया।
अंग्रेजी वेबसाइट डेकन क्रॉनिकल की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी योजना की जानकारी को गुप्त रखने के लिए अपने एक भरोसेमंद अधिकारी समेत 6 लोगों की टीम को चुना था। बता दें कि इनके बारे में भारतीय फाइनैंशल सर्कल में बहुत कम जानकारी थी। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि मोदी के भरोसेमंद अधिकारी हसमुख अधिया और 5 अन्य लोगों को इस सीक्रेट प्लान के बारे में जानकारी थी और ये काम पीएम मोदी के आवास पर गुप्त रूप से चल रहा था। जिसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी।
दरअसल इस योजना को इसलिए भी गुप्त रखा गया था क्योंकि अगर इसकी जानकारी लीक हो जाती तो लोग अपने अवैध धन को सोना, जायदाद और अन्य संपत्तियों में खपा सकते थे। मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने की घोषणा कर दी थी। भारतीय इकॉनमी में ये नोट करीब 86 फीसदी थे।
बता दें कि वित्त मंत्रालय के टॉप अधिकारी अधिया 2003-06 में गुजरात में मोदी के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान प्रधान सचिव के तौर काम किया था। अधिया और मोदी के बीच विश्वास का रिश्ता यहां भी कायम रहा। अधिया को 2015 में राजस्व सचिव बनाया गया था। वैसे तो अधिया की रिपोर्टिंग वित्त मंत्री अरुण जेटली को थी, लेकिन वास्तविकता यह है कि वह सीधे मोदी के साथ संपर्क में रहते थे और जब दोनों इस मुद्दे पर मिलते थे गुजराती में बात करते थे।
सरकार की इस योजना के लिए कुछ अर्थशास्त्रियों से पूछा भी गया था। आरबीआई के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री नरेंद्र जाधव ने कहा कि कोई भी इस तरह के कदम के लिए तैयार नहीं था। लेकिन यह एक रचनात्मक फैसला है। नोटबंदी की घोषणा करते हुए मोदी ने कहा था कि इस फैसले से लोगों को थोड़े दिनों के लिए मुश्किल होगी लेकिन कुछ दिनों बाद चीजें बदलेंगी। मोदी की घोषणा के तुरंत बाद अधिया ने ट्वीट किया था कि ब्लैक मनी को रोकने के लिए सरकार द्वारा यह सबसे बड़ा और सबसे बोल्ड कदम है। मोदी ने लोकसभा चुनाव में विदेश से ब्लैक मनी लाने का भरोसा दिलाया था। लेकिन सत्ता में दो साल से ज्यादा गुजरने के बाद भी वह अपने वादे को पूरा नहीं कर पाए हैं।
मामले को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। हालांकि इस बीच कुछ ऐसे बयान आ रहे थे जिससे नए नोटों की छपाई की बात सामने आई। इस साल मई में आरबीआई ने बताया था कि वह नई सीरीज के नोटों की छपाई की तैयारी कर रहा है। अगस्त में 2000 रुपये के नए नोट के डिजाइन को मंजूरी दी गई थी। अक्टूबर के अंत में मीडिया में इस तरह की खबरें आने लगी थी।

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