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रतन टाटा ने बताया साइरस मिस्त्री को हटाने की वजह

नए चेयरमैन के चयन के लिए एक सर्च कमिटी का गठन किया गया है।

रतन टाटा ने बताया साइरस मिस्त्री को हटाने की वजह
नई दिल्ली. साइरस मिस्त्री को अचानक टाटा संस के चेयरमैन के पद से हटाए जाने पर मची खींचतान के बीच रतन टाटा ने मंगलवार को कहा कि यह बहुत जरूरी हो गया था। रतन टाटा ने कहा कि टाटा समूह की भविष्य की सफलता के लिए सायरस मिस्त्री को हटाना बेहद जरूरी हो गया था। 6,60,000 एंप्लॉयीज वाली इस समूह के अंतरिम चेयरमैन के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे रतन टाटा ने कहा, 'टाटा संस की लीडरशिप में बदलाव का फैसला काफी सोच-समझकर और चर्चा के बाद लिया गया था।'
रतन टाटा के मुताबिक, 'यह कठिन फैसला था, लेकिन जरूरी था। बोर्ड का ऐसा विश्वास था कि टाटा संस के भविष्य की सफलता के लिए इस तरह का फैसला लिया जाना चाहिए।' रतन टाटा का यह पत्र साइरस मिस्त्री के उस ताजा बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि डोकोमो विवाद से संबंधित सभी फैसलों के बारे में रतन टाटा को पूरी जानकारी थी। मिस्त्री ने उन आरोपों को भी खारिज किया था, जिनमें समूह की ओर से कहा गया था कि डोकोमो विवाद में उन्होंने टाटा संस की संस्कृति के मुताबिक काम नहीं किया।
चार साल पहले टाटा संस के चेयरमैन पद से रिटायर हुए 78 वर्षीय रतन टाटा ने अचानक ही साइरस मिस्त्री को हटाकर ग्रुप की कमान संभाल ली थी। टाटा का कहना है कि उन्होंने ग्रुप को स्थिरता और भविष्य में विकास की ओर ले जाने के लिए दोबारा वापसी करने का फैसला लिया है। ग्रुप की ओर से नए चेयरमैन के चयन के लिए एक सर्च कमिटी का गठन किया गया है, तब तक रतन टाटा ही अतंरिम चेयरमैन के तौर पर कामकाज देखेंगे।
इससे पहले मंगलवार को ही मिस्त्री ने बयान जारी कर कहा था, 'डोकोमो मामले में टाटा संस की संस्कृति और मूल्यों के अनुसार फैसले न लेने का आरोप गलत और आधारहीन है।' मिस्त्री ने पद से हटाए जाने के बाद ग्रुप की ओर से लगाए गए आरोपों के जवाब में कहा कि डोकोमो सौदे के बारे में सभी फैसले टाटा संस के निदेशक मंडल की मंजूरी से ही लिए गए थे।
एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल के दौरान उठाए गए सभी कदम सामूहिक रूप से लिए जाने वाले निर्णयों के अनुसार थे। यही नहीं मिस्त्री ने मुकदमा लड़ने के तरीके को लेकर भी साफ किया कि यह कहना गलत होगा कि (डोकोमो मामले में) जिस तरह से केस लड़ा गया, उसे रतन टाटा और न्यासियों से अनुमति नहीं मिलती।'
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