Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

मूर्तिकांडः तमिलनाडु में पेरियार की टूटी मूर्ति को फिर से किया गया स्थापित, पुलिस अभी भी आरोपी की तलाश में जुटी

घटना तमिलनाडू के पुडुक्कोटएई की है जहां किसी अज्ञात व्यक्ति ने पेरियार की मूर्ति को निशाना बनाया था। अज्ञात हमलावरो ने पेरियार की मूर्ति से उनके सर को नीचे गिरा दिया है। लोगो ने स्थानिय प्रशासन की मदद से छतिग्रस्त मूर्ति को एक बार फिर से उसके पुराने स्वरूप में स्थापित कर दिया है

मूर्तिकांडः तमिलनाडु में पेरियार की टूटी मूर्ति को फिर से किया गया स्थापित, पुलिस अभी भी आरोपी की तलाश में जुटी
X
आज सुबह ही तमिलनाडु के पुडुक्कोटएई पेरियार की मूर्ति को अज्ञात लोगो द्वारा छतीग्रस्त कर दिया गया था। जिसके बाद से ही पुलिस मामले की जांच कर रही है। पेरियार की मूर्ति तोड़े जाने से लोगो में काफी रोष था। जिसे लेकर उन्होंने प्रशासन में शिकायत भी दर्ज कराई थी।
अब लोगो ने स्थानिय प्रशासन की मदद से छतिग्रस्त मूर्ति को एक बार फिर से उसके पुराने स्वरूप में स्थापित कर दिया है। ओर वहीं पुलिस अभी भी मूर्ति को हानि पहुंचाने वाले की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस का दावा है कि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उस पर कार्रवाई की जाएगी।
देश में मूर्तिकांड थमने का नाम नहीं ले रहा है ताजा मामला
तमिलनाडू
के पुडुक्कोटएई का है जहां किसी अज्ञात व्यक्ति ने पेरियार की मूर्ति को निशाना बनाया है। अज्ञात हमलावरो ने पेरियार की मूर्ति से उनके सर को नीचे गिरा दिया है।
घटना की ख़बर मिलते ही पुलिस ने इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी है जिससे कि इलाके में कोई अप्रिय घटना ना हो सके। इसके इलावा पुलिस ने अज्ञात आदमी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश कर रही है।
आपको बता दे कि देश में मूर्तिकांड का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों में मशहूर हस्तियों की मूर्तियों को निशाना बनाया जा चुका है। जिसमें पेरियार से लेकर लेनिन,भीमराव अमबेडकर,महात्मा गांधी देश की महान हस्तियों की मूर्तियों को भी निशाना बनाया जा चुका है।
देशभर में इस मूर्तिकांड के चलते विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने इसकी आलोचना की है। ओर राज्य सरकारो से दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग रखी है।

कौन है पेरियार

इरोड वेंकट नायकर रामासामी को पेरियार के नाम से जाना जाता है। ये तमिलनाडु के लोकप्रिय नेताओं में से एक रहे हैं, इनका जन्म 17 सितम्बर 1879 को पश्चिमी तमिलनाडु के इरोड में एक सम्पन्न, परम्परावादी हिन्दू परिवार में हुआ था।
रामासामी बाल विवाह, देवदासी प्रथा, विधवा पुनर्विवाह के विरुद्ध अवधारणा, स्त्रियों तथा दलितों के शोषण के पूर्ण विरोधी थे। उन्होंने हिन्दू वर्ण व्यवस्था का भी बहिष्कार किया था। चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के कहने पर 1919 में उन्होने कांग्रेस की सदस्यता ली। इसके कुछ दिनों के भीतर ही वे तमिलनाडु इकाई के प्रमुख भी बन गए।
इन्होंने हमेशा से ही दलितों के सम्मान और अधिकारों के लिए काम किया, इन्होंने कांग्रेस के नेताओं के समक्ष दलितों और पीड़ितों के लिए आरक्षण का प्रस्ताव भी रखा, जिसे मंजूरी नहीं मिल सकी। जिसके बाद इन्होंने कांग्रेस ही छोड़ दी।
दलितों के समर्थन में 1925 में उन्होने पेरियार आंदोलन भी चलाया। यह आंदोलन नास्तिकता (या तर्कवाद) के प्रसार के लिए जाना जाता है। इसके बाद उन्होंने द्रविड़ कड़गम नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई थी।
इसकी विभिन्न शाखाओं और डीएमके जैसी द्रविड़ियन पार्टियों के सदस्यों ने खुले तौर पर नास्तिकता का प्रसार और उसे स्वीकार किया। हालांकि, समय बीतने के साथ ही इसके कुछ मानने वालों ने धर्म और धार्मिक रीतियों का पालन शुरू कर दिया, जिसके खिलाफ पेरियार ने जीवन भर संघर्ष किया था।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story