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इस ''कुख्यात जेल'' में चल रहा मौत का खेल, 13 हजार लोगों को दी गुपचुप फांसी

मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा।

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नई दिल्ली. सीरिया के राष्ट्रपति बशर-अल-असद की सरकार के विरोधियों को फांसी की सजा दी गई वह भी इतने दर्दनाक और गुपचुप तरीके से कि मौत भी खौफ खा जाए। मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी एक रिपोर्ट में मंगलवार को इस बात का खुलासा कर सब को हैरान कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, सीरियाई सरकार के करीब 13 हजार विरोधियों को सरकारी जेल में गुपचुप तरीके से फांसी लगा दी गई। इस जेल में हर हफ्ते 50 लोगों को सामूहिक तौर पर मौत की सजा दी जाती है। यह रिपोर्ट सुरक्षाकर्मियों, बंदियों और न्यायाधीशों सहित 84 प्रत्यक्षदर्शियों के इंटरव्यू पर आधारित है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की 48 पृष्ठों वाली रिपोर्ट ‘ह्यूमन स्लॉटरहाउस: मास हैंगिंग एंड एक्सटरमिनेशन एट सैदनाया प्रीजन (मानव कसाईखानाः सामूहिक फांसी और सैदनाया जेल में तबाही)’ के अनुसार, 2011 और 2015 के बीच दमिश्क के पास सैदनाया मिलिटरी जेल में सामूहिक फांसी की सजा दी गई और अभी भी वहां मौत का सिलसिला जारी है।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जेल में वकील और ट्रायल के बगैर केवल यातना देकर अपराध कबूल कराया जाता है। जेल के बेसमेंट में ले जाकर दो तीन घंटे तक बुरी तरह से पीटा जाता है। फिर कैदियों को जेल के दूसरी बिल्डिंग में भेज दिया जाता है, जहां बेसमेंट में उन्हें हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया जाता। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनकी आंखों पर पट्टी बंधी होती है।
फांसी पर लटकाने के मात्र एक मिनट पहले उन्हें बताया जाता था कि उन्हें फांसी की सजा दी जाएगी। फांसी के बाद शवों को गुपचुप तरीके से दफना दिया जाता था। उनके परिवार वालों को भी कोई सूचना नहीं दी जाती थी। कैदियों में अधिकतर आम नागरिक थे।
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