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बदतर हालात में सफाई कर्मचारी, 90 प्रतिशत सफाई कर्मचारियों की 60 साल से पहले मौत

सफाईकर्मियों को हेल्थ और इंश्योरेंस की सुविधा नहीं है। करीब 20 लाख सफाईकर्मी गटर-सीवर में काम करते हैं।

बदतर हालात में सफाई कर्मचारी, 90 प्रतिशत सफाई कर्मचारियों की 60 साल से पहले मौत
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नई दिल्ली. एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 60 हजार करोड़ के बजट के साथ देशभर में स्वच्छता अभियान की शुरुआत की है, तो दूसरी तरफ देश का एक कड़वा सच यह भी है कि गटर-सीवर साफ करने वाले 90 फीसदी सफाई कर्मचारियों की 60 की उम्र से पहले ही मौत हो जाती है। गंदगी से जूझते हुए जानलेवा बीमारियां उन्हें अपना शिकार बना लेती हैं। 60 फीसदी सफाईकर्मी कॉलरा, अस्थमा, मलेरिया और कैंसर से पीड़ित हैं।
सफाईकर्मियों को हेल्थ और इंश्योरेंस की सुविधा नहीं है। करीब 20 लाख सफाईकर्मी गटर-सीवर में काम करते हैं। उनके लिए सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं। आज जब गांधी जयंती पर बापू के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने सड़क पर झाड़ू लेकर उतरा है, तो ऐसे मौके पर सफाई कर्मचारियों की दयनीय दशा पर चिंतन जरूरी है।
17 करोड़ लोग वंचित
एक रिपोर्ट के मुताबिक आजादी के 67 बरस बाद भी देश में करीब 17 करोड़ दलित समाज के लोग विकास की मुख्यधारा से वंचित। 13 लाख कर्मचारी मल-मूत्र साफ करने वाले। देश भर में 27 लाख सफाई कर्मचारी। सात लाख सत्तर हजार सरकारी सफाई कर्मचारी हैं। करीब 20 लाख सफाई कर्मचारी ठेके पर काम करते हैं। सफाईकर्मी की औसत कमाई 3 से 5 हजार रुपये महीने। हर महीने करीब 200 सफाईकर्मियों की काम करते वक्त मौत होती है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, स्वच्छ भारत अभियान -
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