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कई राज्यों में फेल रहा स्वस्छ भारत अभियान: सर्वे

40% लोगों ने कहा कि आम नागरिकों के सिविक सेंस में भी इस अभियान के की वजह से सुधार हुआ है।

कई राज्यों में फेल रहा स्वस्छ भारत अभियान: सर्वे
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नई दिल्ली. साल 2014 में गांधी जयंती पर शुरू हुए मोदा सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को आज दो साल पूरे हो गए हैं। लेकिन कहीं ना कहीं पूरे देश में शौचालय बनाने का लक्ष्य था 25 लाख लेकिन अब तक सिर्फ 6 लाख से कुछ ज्यादा बन सके हैं।
19 राज्यों और 60 शहरों में कराए गए एक ऑन लाइन सर्वे में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यूपी के अलावा इस फेहरिस्त में दिल्ली, पंजाब और बिहार का नाम भी शामिल है। पीएम मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को दिल्ली में खुद झाड़ू लगाकर शुरू किया था।
आम नागरिकों से जुड़े एक ऑन लाइन पोर्टल, लोकल सर्कल द्वारा स्वच्छ भारत अभियान को लेकर किए गए इस सर्वे के रिजल्ट में यह सामने आया है कि आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र ने जहां काफी प्रगति की, वहीं तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में थोड़ा सुधार देखने को मिला।
सर्वे में यह भी पाया गया कि स्वच्छ भारत अभियान को लेकर अपनी जिम्मेदारी निभाने में नगरीय निकायों की नाकामी, अमलीकरण की कमजोर प्रक्रिया और आम लोगों में सिविक सेंस की कमी, स्वच्छ भारत अभियान की सफलता में सबसे बड़े रोड़े हैं।
सर्वे के मुताबिक, 41 प्रतिशत लोग मानते हैं कि नगरीय निकाय अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह फेल हुए हैं और अभियान को लागू करने की प्रक्रिया भी काफी कमजोर है। हालांकि 61% लोगों ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान की वजह से उन्हें साफ-सफाई के मामले में 'कुछ सुधार' नजर आता है।
34 प्रतिशत नागरिकों ने कहा कि साफ-सफाई में कुछ सुधार हुआ है (0-10%), 18% ने कहा कि यह ज्यादा अच्छा हुआ है (1030% सुधार), 9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसमें काफी सुधार हुए हैं जबकि 39% नागरिकों को लगता है कि स्वच्छ भारत अभियान का कोई असर नहीं हुआ है।
लोकल सर्कल के चीफ स्ट्रैटिजी ऑफिसर के. यतीश राजावत ने बताया, 'कुछ सुधार का मतलब है 0-10% सुधार। सर्वे के रिजल्ट से पता चलता है कि इसमें धीरे-धीरे प्रगति हो रही है, खास तौर पर सिविक सेंस के मामले में लेकिन नगरीय निकाय अभी तक इसे लेकर गंभीर नहीं हैं।'
उन्होंने बताया कि सर्वे में एक लाख से ज्यादा लोगों ने अलग-अलग प्रश्नों के सेट का उत्तर दिया। सर्वे के मुताबिक सिर्फ 12% नागरिकों ने कहा कि उनके नगरीय निकाय प्रभावशाली तरीके से फॉगिंग करवा रहे हैं और पानी से होने वाली बीमारियों को लेकर जागरुक हैं, जबकि 23% लोगों ने कहा कि कूड़े से जुड़ी शिकायतों और सड़कों पर साफ-सफाई को लेकर नगरीय निकाय पहले के मुकाबले कुछ जिम्मेदार हुए हैं। जिन शहरों में काफी सुधार देखने को मिला उनमें बेलगाम, मेंगलुरु, उदयपुर, कोयंबटूर, मदुरै, हैदराबाद, देहरादून और कोलकाता शामिल हैं।
सर्वे में कुछ और सकरात्मक बातें भी निकलकर सामने आई हैं। 20% लोगों ने कहा कि दो साल पहले स्वच्छ भारत अभियान के शुरू होने के बाद उनके शहर में पब्लिक टॉयलेट की उपलब्धता बढ़ी है। 44% लोगों ने महसूस किया कि इस अभियान की वजह से स्कूली बच्चों में जागरुकता, साफ-सफाई की समझ और सिविक सेंस बेहतर हुआ है। इसी तरह 40% लोगों ने कहा कि आम नागरिकों के सिविक सेंस में भी इस अभियान के की वजह से सुधार हुआ है।
साभार- नवभारत टाइम्स
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