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आर्थिक सर्वे 2018: स्वच्छता अभियान के चलते स्वास्थ्य एवं अर्थव्यवस्था पर पड़ा अनुकूल प्रभाव

सरकार की ओर से स्वच्छता अभियान के चलते स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर अनुकूल प्रभाव पड़ा है। खुले में शौच मुक्त गांव होने में प्रति परिवार रोजाना 50 हजार रुपये की बजत का अनमान है।

आर्थिक सर्वे 2018: स्वच्छता अभियान के चलते स्वास्थ्य एवं अर्थव्यवस्था पर पड़ा अनुकूल प्रभाव
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सरकार की ओर से स्वच्छता अभियान के चलते स्वास्थ्य और आर्थिक स्तिथि पर अनुकूल प्रभाव पड़ा है। खुले में शौच मुक्त गांव होने में प्रति परिवार रोजाना 50 हजार रुपये की बजत का अनमान है।

आर्थिक तौर पर इक्कठा किए गए आकड़ों से पता चलता है कि अब तक पूरे देश में 296 जिलों में स्वच्छता कार्यक्रम के जरिए 3,07,349 गांव को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है।
इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से प्रस्तुत बजट सत्र में संसद में आज पेश 2017-18 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार 2 अक्टूबर 2014 को शुरू किए गए।
स्वच्छता मिशन के शुरूआत होने के बाद स्वच्छता को लेकर 2014 से लेकर 2018 में लोग काफी जागरूक हुए हैं। जो 39 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गया है।
पहले इक्कठा किए गए आकड़ों से यह पता चलता है कि 2014 में खुले में शौच करने वालों की संख्या 55 करोड़ थी लेकिन अब यही आकड़ा 2018 में घटकर 25 प्रतिशत हो गया है।
सरकार ने जिन आठ राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के आकड़ें जमा कर जो सामने रखे हैं उनमें से सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, केरल, हरियाणा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, दमन और दीव तथा चंडीगढ़ शामिल है।
इन राज्यों को पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त कर दिया है। सर्वे के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच जाने वाले व्यक्तियों की संख्या में तेजी से कमी आई है। इससे खुले में शौच से मुक्त क्षेत्रों में सकारात्मक स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव दिखाई पड़ता है।
यूनिसेफ की भारत में स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) का वित्तीय और आर्थिक प्रभाव रिपोर्ट में आकलन किया गया है कि ओडीएफ गांव में एक परिवार प्रतिवर्ष 50,000 रुपये की बचत करता है।

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