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विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए उम्मीद की नई किरण है ये ऐप

दुनिया के किसी भी कोने से मुसीबत में घिरा भारतीय को तत्काल मदद मिल सकेगी।

विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए उम्मीद की नई किरण है ये ऐप
नई दिल्ली. सात समुन्दर पार रोजी-रोटी कमा रहे भारतीयों की सुविधाओं और मुसीबत में उनकी मदद करने के लिए मोदी सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं को कारगर बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने मुसीबत से घिरे होने पर विदेश में प्रवासी भारतीयों को मदद करने वाली योजनाओं में एक और सौगात और दे दी है, जिसके जरिए दुनिया के किसी भी कोने से मुसीबत में घिरा भारतीय को तत्काल मदद मिल सकेगी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ही प्रवासी भारतीयों को उनकी मदद में कारगर साबित होने वाला एक बड़ा तोहफा देते एक ऐसा फेसबुक एप शुरू किया, जिसके माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में किसी भी परेशानी में फंसे भारतीयों को तुरंत मदद मिल पाएगी।
समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया के लोकप्रिय मंच फेसबुक पर 172 देशों में अपने मिशनों को एक साथ समेटकर फेसबुक एक नया एप विकसित किया है, जिससे विदेशों में जरूरतमंद भारतीयों को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक पहुंचने की जरूरत नहीं होगी और वह उन देशों में मौजूद भारतीय उच्चायुक्त या मिशन प्रमुखों से सीधे संपर्क करके मदद हासिल कर सकेंगे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस एप के जरिए अब बर्लिन में हनीमून के लिये पत्नी का पासपोर्ट हासिल करने के लिए लोगों को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मसलन अब मदद के लिए विदेशों में भारतीय उस देश में भारतीय मिशन से संपर्क कर करते हुए अपनी समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर ही करा सकेंगे।
पोर्टल ‘मदद’ भी कारगर
मंत्रालय का दावा है कि मोदी सरकार द्वारा प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय ने प्रवासी भारतीयों की सुविधाओं में विस्तार करने की कई महत्वपूर्ण योजनाओं में आमूलचूल परिवर्तन किये हैं। इन नई योजनाओं के जरिए सात समुंदर पार ऐसे भारतीयों की मुसीबत का साथी बनकर एक वेबसाइट पोर्टल ‘मदद’ को भी शुरू किया है, जो प्रवासी भारतीयों के लिए कारगर साबित हो रहा है। प्रवासी भारतीय मामले के मंत्रालय का दावा है कि ‘मदद’ नामक यह वेबसाईट कोई साधारण वेब साईट नही है, बल्कि इसमे यह सुनिश्चित किया गया है कि इन भारतीयो तक फौरन ही संबन्धित देश में स्थित भारतीय दूतावास कारगर ढंग से उन्हें मदद करे। दरअसल केंद्र सरकार ने इस पोर्टल को इस तरह से डिजाइन कराया है, जिसमें भारतीयो को एक निश्चित समय सीमा के भीतर मे फौरी राहत मिल सकेगी। यही नहीं इसके अलावा सरकार ने संबन्धित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।

खाड़ी देशों की मुसीबत
मंत्रालय के अनुसार ज्यादातर खाड़ी देशों से भारतीय कामगारों की समस्याओं की शिकायतें मिलती रहती है। इनमें प्राय मजदूरी न दिए जाने अथवा देर से दिए जाने, कामकाज और रहने की कठिन परिस्थितियां, कामगारों के अनुबंध में एकपक्षीय बदलाव, नियोक्ता द्वारा पासपोर्ट अपने पास रखना, दलालों द्वारा धोखा देना, शारीरिक और यौन उत्पीड़न इत्यादि प्रमुख हैं। सरकार की योजनाओं में मुसीबत में घिरे भारतीय कामगारों को कानूनी मदद मुहैया कराना भी शामिल है। इसी दृष्टि से भारत सरकार ने भारतीय श्रमिकों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रवासी भारतीय मामले मंत्रालय खासकर संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान, बहरीन और मलेशिया जैसे खाड़ी देशों समेत अनेक देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते करती रही है।
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