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सुषमा ने दी नौकरी की चाह रखने वाली महिलाओं को सलाह, अपनाएं ''डोकलाम फॉर्मूला''

सुषमा ने महिलाओं के मुद्दों को व्यापक तौर पर तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

सुषमा ने दी नौकरी की चाह रखने वाली महिलाओं को सलाह, अपनाएं

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज महिला टाउन हॉल कार्यक्रम के दौरान नौकरी के लिए अपने परिवार को मनाने की कोशिश कर रही महिलाओं को कूटनीतिक सलाह दी है।

दरअसल सुषमा ने कहा कि महिलाएं अपने परिवार को ठीक उसी तरह समझाएं-बुझाएं जिस तरह से डोकलाम गतिरोध के समय भारत ने चीन के साथ किया था।

बता दें कि गुजरात में बीजेपी की ओर से आयोजित महिला टाउन हॉल कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री से सवाल किया गया था कि यदि परिवार नौकरी की इजाजत नहीं दे तो ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए।

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इस सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि परिवार के सदस्यों को समझाना चाहिए कि एक कामकाजी महिला परिवार को कैसे लाभ पहुंचाती है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि अगर परिवार के सदस्य नहीं समझते तो उन्हें वैसे ही समझाना चाहिए जैसे भारत ने डोकलाम गतिरोध के मुद्दे पर चीन को समझाया था।

गौरतलब है कि डोकलाम गतिरोध भारत और चीन के बीच करीब दो महिने तक चला था जिसे आखिरकार दोस्ताना तरीके से सुलझा लिया गया था।

सुषमा ने महिलाओं के मुद्दों को व्यापक तौर पर तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है- सुरक्षा से जुड़े मुद्दे, आजादी से जुड़े मुद्दे और सशक्तिकरण का मुद्दा। सुषमा ने कहा, बच्ची की सुरक्षा से जुड़ा सबसे पहला मुद्दा होता है कि क्या समाज उसे पैदा होने देगा। लोग अब भी गर्भ में बच्ची को मार डालते हैं'।

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इसके अलावा सुषमा ने कहा कि देश में कई कानून हैं, लेकिन पीएम मोदी जी का मानना है कि एक सामाजिक अभियान शुरू करने की जरुरत है। क्योंकि इस बुराई से लड़ने के लिए सिर्फ कानून काफी नहीं है।

सुषमा ने बताया कि हमने देश में बडे़ पैमाने पर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की है। केंद्र एवं राज्यों की सरकारों ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने महिलाओं की वित्तीय आजादी सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे मुद्रा योजना के तहत उन्हें कर्ज दिया जा रहा है।

सुषमा ने विदेश मंत्री के तौर पर अपने काम को लेकर कहा कि वे अपने काम से संतुष्ट हैं। क्योंकि वह अलग-अलग देशों में फंसे 88,302 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने में कामयाब रही हैं।

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