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IAF की मारक क्षमता पर एक नजर: ये हैं भारत के पावरफुल फाइटर जेट, जानें इनके बारे में

मिराज- 2000 वही विमान (जेट) हैं जिन्होंने भारत को कारगिल युद्ध जीतने में मदद की थी। मिराज -2000 के अलावा, भारतीय वायु सेना भी लड़ाकू जेट के रूप में आधुनिक युग के युद्ध का मालिक है, जिसमें रूसी सुखोई एसयू-30 एमकेआई और एमआईजी 29 शामिल हैं, स्वदेशी रूप से विकसित तेजस एलसीए और एजिंग जैगुआर। सुखोई एसयू-30 एमकेआई से लेकर तेजस एलसीए तक सभी सक्रिय फाइटर जेट्स की एक सूची को भारतीय वायु सेना के स्वामित्व (owned) वाले मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों और स्ट्राइक एयरक्रॉफ्ट भी कहा जाता है।

IAF की मारक क्षमता पर एक नजर: ये हैं भारत के पावरफुल फाइटर जेट, जानें इनके बारे में

मंगलवार को भारतीय वायुसेना के 12 मिराज- 2000 विमानों ने पीओके में बालाकोट, मुजफ्फराबाद और चकोट में आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद के कैंपों पर 1000 किलोग्राम के बम गिराए। जिसमें 300 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर है। मिराज 2000 फ्रांस की कंपनी डेसॉल्ट विमानन द्वारा बनाए गए हैं। मिराज- 2000 वही विमान (जेट) हैं जिन्होंने भारत को कारगिल युद्ध जीतने में मदद की थी। मिराज -2000 के अलावा, भारतीय वायु सेना भी लड़ाकू जेट के रूप में आधुनिक युग के युद्ध का मालिक है, जिसमें रूसी सुखोई एसयू-30 एमकेआई और एमआईजी 29 शामिल हैं, स्वदेशी रूप से विकसित तेजस एलसीए और एजिंग जैगुआर। सुखोई एसयू-30 एमकेआई से लेकर तेजस एलसीए तक सभी सक्रिय फाइटर जेट्स की एक सूची को भारतीय वायु सेना के स्वामित्व (owned) वाले मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों और स्ट्राइक एयरक्रॉफ्ट भी कहा जाता है।

मिराज-2000 (Mirage-2000)

मिराज -2000 भारतीय वायु सेना के सबसे बहुमुखी और प्रहार करने वाले विमानों में से एक है। मिराज -2000 को साल 1985 में पहली बार शामिल किया गया था। मिराज जेट को शामिल करने के तुरंत बाद, भारतीय वायुसेना (IAF) ने इसे वज्र (Vajra) नाम दिया था जिसका संस्कृत में अर्थ वज्रपात है। मिराज -2000 को फ्रांस दसॉल्ट विमानन द्वारा बनाया गाया है जिसने 1978 में अपनी पहली उड़ान भरी थी। साल 1984 में फ्रांसीसी वायु सेना में शामिल किया गया था। भारत ने फ्रांस को 1984 में 36 सिंगल-सिटर मिराज 2000 और 4 डबल सिटर का ऑर्डर दिया था। जिसके जवाब में पाकिस्तान ने अमेरिका से (US) कि लॉकहीड मार्टिन के F-16 फाइटर जेट खरीदे। 1999 में हुआ कारगिल युद्ध में फइटर जेट मिराज -2000 ने अहम भूमिका निभाई थी। मिराज -2000 की सफलता को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2004 में 10 मिराज -2000 विमानों का अतिरिक्त ऑर्डर दिया, जिसमें कुल मिलाकर 50 जेट थे।

एचएएल तेजस एलसीए (HAL Tejas LCA)

भारत ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएल) के द्वारा स्थानीय स्तर पर तेजस एलसीए निर्माण करने के लिए एक लाइसेंस समझौते के तहत रूस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों से फाइटर जेट लिए। तेजस भारत द्वारा विकसित किया जा रहा एक हल्का व कई तरह की भूमिकाओं वाला जेट लड़ाकू विमान है। यह एचएएल द्वारा विकसित एक सीट और एक जेट इंजन वाला विमान है जो अनेक भूमिकाओं को निभाने में सक्षम है। इसका विकास 'हल्का युद्धक विमान' या (एलसीए) नामक कार्यक्रम के अन्तर्गत हुआ है जो 1980 के दशक में शुरू हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 में इन विमान का आधिकारिक नाम तेजस रखा था। तेजस ने पुराने पड़ रहे मिग-21 का स्थान लिया। शुरुआत में इंडियन एयफोर्स ने 20 जेट ऑर्डर किए और 2016 में फ्लाइंग डैगर्स नामक एक तेजस स्क्वाड्रन का गठन किया गया। एआईएफ ने अबतक 40 तेजस एमके का ऑर्डर किया है। जिसमें 32 सिंगल सिटर और आठ डबल सिटर ट्रेनर शामिल हैं।

मिकोयान मिग -21 (Mikoyan MiG-21)

मिकोयान मिग -21 (Mikoyan MiG-21) विमान विमानन इतिहास में पहला सुपरसोनिक जेट विमान है। जो कि धरती पर सबसे प्रसिद्ध फाइटर जेट्स में से एक है। मिग -21 ने 60 वर्षों के दौरान 60 देशों में अपनी सेवा दी है, यह अब भी भारत के अलावा अन्य देशों में अपनी सेवा दे रहा है। भारतीय वायुसेना ने 1961 में मिकोयान-गुरेविच डिजाइन ब्यूरो के लिए मिकोयान मिग -21 को चुना और उसके बाद 250 से अधिक युनिट को खरीदा। क्योंकि इसकी छमता अविश्वसनीय थी। मिकोयान मिग -21 ने 1971 में भारत पाकिस्तान के युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। इस समय मिकोयान मिग -21 इंटरप्टर्स के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। वायुसेना इसे जल्द ही तेजस एलसीए के साथ बदलेगा। मिग- 21 1300 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ता है।

सुखोई एसयू-30 एमकेआई (Sukhoi Su-30MKI)

एसयू-30 एमकेआई विमान भारतीय वायु सेना का सबसे घातक फाइटर जेट है। यह विमान दुश्मन को हवा में ही मार गिराता है। एसयू-30 एमकेआई विमान को रूस के सुखोई के साथ एचएएल के द्वारा लाइसेंस समझौते के तहत भारत में बनाया गया, जिसे फ्लंकर (एनएटीओ) के रूप में भी जाना जाता है। एसयू-30 एमकेआई का विशेष रूप से भारत में उपयोग किया जाता है। वायुसेना के पास एसयू-30 एमकेआई की 290 से अधिक प्रचालन युनिट हैं। वायु सेना में एसयू-30 एमकेआई की पहली युनिट को 2002 में शामिल किया गया था। सुखोई एसयू-30 एमकेआई की 2120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार है और यह 38,800 किलोग्राम वजनी है। सुखोई एसयू-30 एमकेआई बम, मिसाइल को भी ले जाने में सक्षम है।

मिकोयान मिग 27 (Mikoyan MiG-27)

मिकोयान मिग-27 जमीन पर हमला करने वाला सबसे घातक लड़ाकू विमान है। मिकोयान मिग-27 को सोवियत संघ में मिकोयान-गुरेविच ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन और निर्मित किया गया था। लाइसेंस समझौते के तहत भारत में एचएएल के द्वारा भारत में निर्मित किया गया था। भारत में मिग-27 को 'बहादुर' के रूप में जाना जाता है। भारतीय वायु सेना ने 2017 में अंत में 27 ML स्क्वाड्रन को रिटायर्ड किया कर दिया। भारत अब भी देशों में शामिल है जो अपडेटेड मिग -27 यूपीजी जमीनी हमला (ground attack) जेट का संचालन करता है। भारत में 2015 तक कुल 87 उन्नयन मिग-27एमएल सक्रिय है। मिग-27 मिग-23 पर आधारित है। मिग-27 को 15 साल के भी कम समय में बनाया गया था। जिसके बाद इसके क्रैश होने की खबरे सामने आती रही थी।

सेपेकैट जैगुआर (Sepecat Jaguar)

सेपेकैट जैगुआर फाइटर जेट को ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स और फ्रांसीसी एयर फोर्स के द्वारा विकसित किया गया था। इस समय केलव भारतीय वायुसेना सेपेकैट जैगुआर फाइटर जेट का इस्तेमाल करती है। सेपेकैट जैगुआर फाइटर जेट को शमशेर के नाम से भी जाना जाता है। इस जेट का इस्तेमाल जमीनी हमले के रूप में किया जाता है। आरएफ के जैगुआर से भारतीय जैगुआर फाइटर जेट काफी अलग है। लाइसेंस समझौते के तहत एचएएल द्वारा भारतीय जैगुआर को निर्मित किया गया। भारतीय जैगुआर भारी वजन लेकर उड़ान भरने में असमर्थ है।

मिकोयान मिग-29 (Mikoyan MiG-29)

1970 के दशक में अमेरिका के एफ सीरीज वाले एफ-16, एफ-15 विमानों का मुकाबला करने के लिए मिग-29 की शुरुआत की गई। मिग-29 'बाज' के नाम से भी जाना जाता है। सुखाई एसयू-30 एमकेआई के इसे दूसरा स्थान मिला। मिग-29 को 30 से अधिक देशों में निर्यात किया जाता है लेकिन भारत मिग-29 फाइटर जेट का पहला और सबसे बड़ा निर्यातक देश है। भारतीय वायुसेना वर्तमान में मिग -29 UPG का उपयोग करता है, जो अब तक का सबसे उच्च मिग-29 संस्करण है। भारतीय वायु सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर मिग-29 का उपयोग किया गया था ताकि लेजर बमों के साथ मिराज-2000 के द्वारा हमला करने के लक्ष्य के लिए रक्षा प्रदान करें। सोवियत संघ में मिकोयान-गुरेविच डिजाइन ब्यूरो ने मिग-29 को डिजाइन किया था।

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