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सर्जिकल स्ट्राइक 2 : रक्षा विशेषज्ञों ने कहा - एक ही झटके में पाक की बोलती बंद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बालाकोट की कार्रवाई को नहीं बना पाएगा पाकिस्तान मुद्दा

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) द्वारा मंगलवार सुबह तड़के साढ़े तीन बजे नियंत्रण रेखा लांघकर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को नेस्तनाबूद करने की कार्रवाई का रक्षा विशेषज्ञों ने पुरजोर समर्थन किया है।

सर्जिकल स्ट्राइक 2 : रक्षा विशेषज्ञों ने कहा - एक ही झटके में पाक की बोलती बंद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बालाकोट की कार्रवाई को नहीं बना पाएगा पाकिस्तान मुद्दा

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) द्वारा मंगलवार सुबह तड़के साढ़े तीन बजे नियंत्रण रेखा लांघकर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को नेस्तनाबूद करने की कार्रवाई का रक्षा विशेषज्ञों ने पुरजोर समर्थन किया है।

उनका कहना है कि बीते 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए जैश के फिदायीन आतंकी हमले के बाद उन्हें सबक सिखाने के लिए इस तरह की कार्रवाई करने की बेहद आवश्यकता थी। इसका हर देशवासी को बेसब्री से इतंजार था।

जिसे वायुसेना द्वारा पीओके में मौजूद जैश के आतंकी ठिकाने को निशाना बनाकर किसी आम पाकिस्तान नागरिक के जान-माल के नुकसान के बिना सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया गया है। गौरतलब है कि पुलवामा के हमले में जैश के फिदायीन हमले में सीआरपीएफ के कुल 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद से देश भर में पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने को लेकर कड़ा जनआक्रोश पनप रहा था।

पहले से मंथन में था विकल्प

सेना से उप-सेनाप्रमुख के पद से सेवानिवृत हुए वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ले़ जनरल राज कादयान ने हरिभूमि से बातचीत में कहा कि पुलवामा हमले के बाद सेना सहित देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियों के बीच पाक समर्थित आतंकियों को सबक सिखाने के लिए जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा था। उसमें हवाई कार्रवाई का विकल्प भी शामिल था।

यह भारत की ओर से की गई स्वभाविक प्रतिक्रया है। क्योंकि बीते कई वर्षों से भारत द्वारा पाकिस्तान से लगातार यह कहा जा रहा था कि वो अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए न करे। लेकिन पाक की ओर से इसपर कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं की गई। जिसके बाद वायुसेना को आत्मरक्षा में यह उचित कदम उठाना पड़ा।

नहीं मिलेगा अंतरराष्ट्रीय समर्थन

वायुसेना के वरिष्ठ सेवानिवृत अधिकारी एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर ने कहा कि वायुसेना द्वारा इस कार्रवाई में केवल बालाकोट में जैश के आतंकी ठिकाने को निशाना बनाया गया है। इसमें किसी आम पाकिस्तानी नागरिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। भारत की ओर से दिए गए शुरूआती आधिकारिक बयान में ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि भारतीय वायुसेना की यह कार्रवाई पाकिस्तान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई नहीं है।

यह केवल आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए आत्मरक्षा में उठाया गया अहम कदम है। इसलिए अब पाक इस मसले को भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई का झूठा रूप देकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष चाहकर भी नहीं उठा पाएगा। उन्होंने मिराज-2000 विमान की विशेषता के बारे में बताते हुए कहा कि यह वायुसेना का एक अचूक मारक लड़ाकू विमान होता है।

इसे दुश्मन के इलाके में तुरंत प्रवेश कर उसके रडार को आसानी से चकमा देकर सटीक कार्रवाई करने के लिए जाना जाता है। वायुसेना के विमानों द्वारा एलओसी लांघकर ऐसी कार्रवाई वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद आज की गई है। 1999 के करगिल युद्ध में भी सरकार की ओर से वायुसेना को एलओसी को पार करने का आदेश नहीं दिया गया था। देश में सेनाएं दुश्मन की किसी भी जवाबी प्रतिक्रिया का जवाब देने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद हैं।

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