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CBI vs CBI: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को लगा झटका, आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का फैसला रद्द

सीबीआई बनाम सीबीआई के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है । तीन जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई छुट्टी पर हैं। इस लिए सिर्फ दो जजों ने इस मामले पर फैसला सुनाया।

CBI vs CBI: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को लगा झटका, आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का फैसला रद्द
सीबीआई बनाम सीबीआई (CBI vs CBI) के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुनाया है (Supreme Court Verdict)। तीन जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) रंजन गोगोई (Chief Justice Ranjan Gogoi) छुट्टी पर हैं। इस लिए सिर्फ दो जजों ने इस मामले पर फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि आलोक वर्मा (Alok Verma) को सीवीसी (CVC) ने जिस तरह छुट्टी पर भेजा है वह असंवैधानिक है। सीबीआई डायरेक्टर (CBI Director) को हटाने के लिए एक कमेटी होती है। जिसके बिना ही उन्हें हटा दिया गया। कमेटी में प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस और विपक्ष के नेता होते हैं। इस लिए यह फैसला रद्द किया जाता है।
इस फैसले के रद्द होते ही आलोक वर्मा (Alok Verma) और राकेश अस्थाना (Rakesh Asthana) दोनों ही अपने पद पर वापस आ जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि आलोक वर्मा को वापस बहाल किया जाए। लेकिन वह कोई भी नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे। सीवीसी (CVC) ने अपनी जांच रिपोर्ट में आलोक वर्मा पर कई आरोप लगाए थे।
जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीवीसी की रिपोर्ट के मुताबिक आलोक वर्मा की जांच की जाए। उच्च स्तरीय कमेटी ही सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को हटाने का फैसला करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा। मोदी सरकार ने उन्हें और राकेश अस्थाना को झगड़े के बाद छुट्टी पर भेज दिया था। कोर्ट ने सीबीआई निदेशक को हटाने न हटाने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक बुलाने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा

  • जिस तरह से आलोक वर्मा को सीवीसी ने रातों रात छुट्टी पर भेजा वह असंवैधानिक है। इस लिए सीवीसी के आदेश को खारिज किया जाता है।
  • आलोक वर्मा को पुनः उनके पद पर बहाल किया जाए।
  • आलोक वर्मा कोई भी नितिगत फैसला यानी कि ट्रांसफर, सस्पेंशन और बहाली नहीं कर सकते।
  • राकेश अस्थाना को भी उनका पद वापस मिलेगा।
  • सीवीसी चाहे तो अपनी रिपोर्ट के मुताबिक आलोक वर्मा पर कार्रवाई करे।

क्या है पूरा मामला

सीबीआई के अंदर दो बड़े अधिकारियों के बीच विवाद शुरु हो गया था। सीबीआई के निदेशक यानी नंबर 1 आलोक वर्मा ने सीबीआई के नंबर 2 राकेश अस्थाना पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इसके जवाब में अस्थाना ने आलोक वर्मा पर 2 करोड़ की घूस लेने का आरोप लगाया था। जिसके बाद सीबीआई (Central Bureau of Investigation) में घमासान मच गया था।

जिसके बाद सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। सीवीसी (CVC) (Central Vigilance Commission) ने दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने की राय सरकार को दी। सरकार ने केंद्रीय सतर्कता आयोग की बात मानते हुए दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया। साथ ही सीबीआई के नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक बनाया गया था।

सरकार ने यह फैसला रातों-रात लिया था। जिसके बाद सरकार को कोफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस मामले पर सरकार को जमकर घेरा। NGO कॉमनकॉज और आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की।

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