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SC ने आम्रपाली ग्रुप के तीन निदेशकों को भेजा पुलिस हिरासत में

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह के तीन निदेशकों को मंगलवार को पुलिस हिरासत में देते हुये उन्हें समूह की 46 कंपनियों के सारे दस्तवेज फारेंसिक आडिटर को सौंपने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने आम्रपाली समूह द्वारा सारे दस्तावेज फारेंसिक आडिटर को नहीं सौंपे जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि ये दस्तावेज सौंपे जाने तक वे पुलिस हिरासत में ही रहेंगे।

SC ने आम्रपाली ग्रुप के तीन निदेशकों को भेजा पुलिस हिरासत में
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सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह के तीन निदेशकों को मंगलवार को पुलिस हिरासत में देते हुये उन्हें समूह की 46 कंपनियों के सारे दस्तवेज फारेंसिक आडिटर को सौंपने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने आम्रपाली समूह द्वारा सारे दस्तावेज फारेंसिक आडिटर को नहीं सौंपे जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि ये दस्तावेज सौंपे जाने तक वे पुलिस हिरासत में ही रहेंगे।

पुलिस हिरासत में भेजे गये निदेशकों के नाम अनिल शर्मा, शिव प्रिय और अजय कुमार हैं। पीठ ने समूह के इस रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा कि आप न्यायालय के साथ लुका छिपी खेल रहे हैं। आप न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

शीर्ष अदालत ने आम्रपाली समूह के मकान खरीदारों की याचिकाओं पर यह आदेश दिया। आम्रपाली समूह में मकान बुक कराने वाले ये खरीदार करीब 42,000 फ्लैट का कब्जा चाहते हैं। पीठ ने कहा कि निदेशकों का आचरण न्यायालय के आदेशों का घोर उल्लंघन है।

पीठ ने दिल्ली पुलिस को आम्रपाली समूह के सारे दस्तावेज जब्त करने और उन्हें फारेंसिक आडिटर को सौंपने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि इन कंपनियों का एक भी दस्तावेज समूह के पास नहीं रहना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लि (एनबीसीसी) को आम्रपाली समूह के अधर में अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिये बिल्डर का चयन करने हेतु निविदा आमंत्रित करने की अनुमति दी थी।

नयायालय ने एनबीसीसी से कहा था कि वह 60 दिन के भीतर लंबित परियोजना के बारे में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करे। न्यायालय ने 12 सितंबर को आम्रपाली समूह की रूकी हुई परियोजनाओं को विकसित करने लिये एनबीसीसी को नियुक्त किया था और कर्ज वसूली ट्रिब्यूनल को समूह की बगैर देनदारी वाली वाणिज्यिक संपत्ति बेचने का निर्देश दिया था।

न्यायालय ने शीर्ष अदालत में एक एस्क्रो खाता खोलने का भी निर्देश दिया था जिसमे इन संपत्तियों को बेचने से मिलने वाली रकम जमा करायी जायेगी और बाद में इसे समूह ‘ए' और ‘बी' श्रेणी की लंबित परियोजनाओं का निर्माण शुरू करने के लिये एनबीसीसी को दी जायेगी।

इसके अलावा, न्यायालय ने इन सभी 46 कंपनियों और जोतिन्द्र स्टील के 2008 से बैंक खाते, इनकी बैलेंस शीट और दूसरे दस्तावेज फारेंसिक आडिटर्स को देने का निर्देश दिया था।

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