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सिनेमाघर में राष्ट्रगान के समय खड़ा न होने वाला कम देशभक्त नहींः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को नियंत्रित करने के लिए नियमों में संशोधन पर विचार करे।

सिनेमाघर में राष्ट्रगान के समय खड़ा न होने वाला कम देशभक्त नहींः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान मामले की सुनवाई के दौरान अपना फैसला पूरी तरह बदल दिया। कोर्ट ने कहा कि देशभक्ति साबित करने के लिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने की जरूरत नहीं है।

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उसके बाद कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को नियंत्रित करने के लिए नियमों में संशोधन पर विचार करे। पहले सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सिनेमाघरों में राष्ट्रीयगान के दौरान खड़ा होना जरूरी होगा।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि हमें ये क्यों मानना चाहिए कि जो राष्ट्रगान नहीं गाते, वे देशभक्त नहीं हैं या कम देशभक्त हैं। देशभक्ति के लिए राष्ट्रगान गाना जरूरी नहीं है।

लेकिन अब कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगान के लिए खड़ा नहीं होता है तो ऐसा नहीं माना जा सकता कि वह कम देशभक्त है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रगान नहीं गाने को राष्ट्रविरोधी नहीं कहा जा सकता। देशभक्ति दिखाने के लिए राष्ट्रगान गाना जरूरी नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि क्या हर वक्त बांहें उठाकर राष्ट्रीयता की दुहाई दी जा सकती है। मॉरल पुलिसिंग (नैतिकता का पाठ) को बंद किया जाना जरूरी है। पीठ ने संकेत दिया कि वह एक दिसंबर 2016 के अपने आदेश में सुधार कर सकती है।

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