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कर्नाटकः येदियुरप्पा का शपथ ग्रहण रुकवाने के लिए कांग्रेस पहुंची SC, कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कोर्ट बीजेपी नेता येदियुरप्पा को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से नहीं रोक सकता। कोर्ट ने इस मुद्दे की सुनवाई के लिए कांग्रेस को कल की अगली तारीख दी है।

कर्नाटकः येदियुरप्पा का शपथ ग्रहण रुकवाने के लिए कांग्रेस पहुंची SC, कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार
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कर्नाटक चुनाव के बाद राज्य में सरकार बनाने को लेकर मुख्य राजनीतिक दल कांग्रेस और जेडीएस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दरअसल कर्नाटक में सरकार बनाने को लेकर चल रहा विवाद सुलझने कि बजाय और भी पैचिदा हो गया जब कांग्रेस ने जेडीएस के साथ मिलकर राज्यपाल के उस फैसले के खिलाफ सु्प्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें गर्वनर ने बीजेपी नेता येदियुरप्पा को एकल मुख्य राजनीतिक दल होने के कारण कर्नाटक में सरकार बनाने का न्यौता भेजा था।

राज्यपाल के इसी फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने राज्यपाल के इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रिम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कोर्ट बीजेपी नेता येदियुरप्पा को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से नहीं रोक सकता। कोर्ट ने इस मुद्दे की सुनवाई के लिए कांग्रेस को कल की अगली तारीख दी है।

वहीं कांग्रेस की तरफ से इस मामले में पैरवी करने वाले वकील ने मीडिया को बताया कि हमने सरकार से 15 मई के उस पत्र को सामने रखने को कहा है जिसमें येदियुरप्पा ने कर्नाटक में सरकार बनाने का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपा था।

कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने आज भाजपा विधायक दल के नेता बी एस येदियुरप्पा को राज्य में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। राज्यपाल के इस फैसले को चुनौती देने के लिये कांग्रेस उच्चतम न्यायालय पहुंच गई है। राज्यपाल के कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पार्टी ने कहा कि वजुभाई वाला ने संविधान की बजाय भाजपा में अपने मालिकों' की सेवा चुनी और भाजपा की कठपुतली के तौर पर काम किया।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पार्टी ने न्यायालय से आज रात ही राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने वाली उसकी याचिका पर सुनवाई की मांग की है। उन्होंने कहा हमने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। रजिस्ट्रार से अनुरोध किया है कि आज रात ही इसपर सुनवाई की अनुमति दी जाए।

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राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिनभर सत्ता के लिये चली प्रतिस्पर्धा और भाजपा तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के कांग्रेस के आरोपों के बीच दिया है। राज भवन के एक पत्र के अनुसार, मैं आपको(येदियुरप्पा को) सरकार बनाने के लिए और कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए आमंत्रित करता हूं।

वाला ने येदियुरप्पा से मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के 15 दिन के अंदर विश्वास मत हासिल करने को भी कहा। भाजपा महासचिव मुरलीधर राव ने संवाददाताओं को बताया कि येदियुरप्पा कल यहां सुबह नौ बजे शपथ लेंगे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने की संभावना नहीं है। इससे पहले, कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए पुरजोर प्रयास करते हुए येदियुरप्पा और नवगठित जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के नेता एच डी कुमारस्वामी, दोनों ने ही राज्यपाल वाला से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था।

राज्यपाल के कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा वजुभाई वाला ने राज भवन की गरिमा धूमिल की, संविधान और नियमों की अवहेलना की तथा भाजपा की कठपुतली के तौर पर काम किया। उन्होंने कहा राज्यपाल ने संविधान की बजाय भाजपा में अपने मालिकों (मास्टर्स इन बीजेपी) की सेवा चुनी।

सुरजेवाला ने कहा कर्नाटक भाजपा ने (न्यौते के बारे में) पहले से सूचना दे दी। जब आदेश भाजपा मुख्यालय से आते हों तो फिर राज्यपाल पद की गरिमा का क्या होगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा राज्यपाल ने येदियुरप्पा को बहुमत जुगाड़ने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। 15 दिन का समय 104 को 111 में बदलने के लिए दिया गया है।

उधर भाजपा ने कर्नाटक के राज्यपाल के फैसले का बचाव किया । पार्टी ने कहा कि राज्यपाल ने बी एस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता देने में संविधान और उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुसार कदम उठाया है। उसने कांग्रेस पर जनादेश को लूटने का प्रयास करने का आरोप लगाया है ।

भाजपा ने कहा कि वह विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर देगी और चुनाव के बाद बने कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन को ‘अपवित्र और अस्वीकार्य' बताया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राव ने कहा कि कांग्रेस और जद (एस) के बीच तालमेल सिर्फ भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिये था।

जद(एस) नेता एच डी कुमारस्वामी ने येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता देने के लिये राज्यपाल वाला की आलोचना की और मोदी सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया। नाराज कुमारस्वामी ने येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता मिलने के तुरंत बाद संवाददाताओं से कहा हम इसे आसानी से जाने नहीं देंगे।

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कुमारस्वामी ने कहा कि राज्यपाल को येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिये तीन से चार दिन का वक्त देना चाहिये था। उन्होंने कहा येदियुरप्पा के पास बहुमत नहीं है। राज्यपाल के कदम का बचाव करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने संविधान के बारे में सीख देने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसकी पूर्व की सरकारों ने विपक्ष के शासन वाले राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाकर इसका सर्वाधिक उल्लंघन किया।

224 सदस्यीय विधानसभा में 104 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। वहीं, चुनाव के पश्चात बने जद (एस)-कांग्रेस गठबंधन के 116 विधायक हैं। गठबंधन ने एक निर्दलीय विधायक का समर्थन होने का भी दावा किया है। सबसे बड़ी पार्टी या चुनाव पूर्व या चुनाव बाद बने गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता देने की परंपरा रहने को देखते हुए राज्यपाल वाला ने पहले विकल्प को चुना। वह गुजरात में आरएसएस-भाजपा के बड़े नेता रह चुके हैं।

इससे पहले दिन में कुमारस्वामी ने दावा किया कि भाजपा ने उसके विधायकों को अलग होने और भगवा पार्टी का समर्थन करने के लिये 100-100 करोड़ रुपये और मंत्री पद की पेशकश की है। हालांकि भाजपा ने आरोपों से इनकार किया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आरोपों को काल्पनिक बताया।

निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला करते हुए आरोप लगाया कि बहुमत से थोड़ा पीछे रहने के बावजूद वह राज्य की सत्ता में भाजपा की वापसी सुनिश्चित करने के लिए विधायकों की खरीद फरोख्त को बढ़ावा दे रहे हैं। कुमारस्वामी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा भाजपा ने हमारे विधायकों को तोड़ने के लिए 100 करोड़ की रिश्वत की पेशकश की है।

मैं जानना चाहता हूं कि यह काला धन है या सफेद धन। उन्होंने कहा जद (एस)-कांग्रेस गठजोड़ के पास 116 विधायक हैं (जद (एस) की चुनाव पूर्व सहयोगी बसपा सहित) भाजपा केंद्र में होने के नाते अपनी ताकत का दुरूपयोग और विधायकों की खरीद फरोख्त के जरिये अपनी सरकार का गठन करने की कोशिश कर रही है। जावड़ेकर ने आरोपों का मजबूती से खंडन करते हुए कहा 100 करोड़ 200 करोड़ की बात काल्पनिक है।

भाजपा ऐसा नहीं कर रही। हमें विधायकों की खरीद फरोख्त करने की आदत नहीं है। इस तरह की राजनीति जद (एस) और कांग्रेस करते हैं। हम नियमों का पालन करते हुए सरकार का गठन करेंगे। कुमारस्वामी ने संवाददाताओं से कहा कि भाजपा सत्ता में आने के लिए ‘‘ऑपरेशन कमल' दोहराने की कोशिश कर रही है।

ऑपरेशन कमल शब्द का इस्तेमाल 2008 में किया था जब भाजपा के पास विधानसभा में बहुमत नहीं था और उसके नेता कथित रूप से धन एवं पद की पेशकश कर कांग्रेस के तीन एवं जद (एस) के चार विधायकों को इस्तीफा देने के लिए मनाने में सफल रहे थे।

बाद में वे सभी भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़े और पांच को जीत मिली। इससे भाजपा को लाभ मिला क्योंकि उनके इस्तीफे से सदन में बहुमत साबित करने के लिए जरूरी संख्या कम हो गयी ऐसी भी खबरें हैं कि भाजपा द्वारा खरीद-फरोख्त किये जाने के खतरे से बचने के लिये जद (एस) और भाजपा के विधायकों को पर्यटक रिसॉर्ट में रखा जाएगा।

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