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धारा 377 पर तीन दिन से चल रही बहस थमी, फैसले के लिए अगली सुनवाई का इंतजार

समलैंकिता को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लगातार तीन दिन से बहस जारी था। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 17 जुलाई की तिथि तय की है।

धारा 377 पर तीन दिन से चल रही बहस थमी, फैसले के लिए अगली सुनवाई का इंतजार
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समलैंकिता को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लगातार तीन दिन से बहस जारी थी। गुरुवार को बहस के बाद कोर्ट ने कहा है कि अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी। धारा 377 को लेकर मंगलवार से बहस चल जारी थी।

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ कर रही है। इस पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा चार और जज आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा शामिल हैं।

केंद्र ने इस सुनवाई के दौरान समलैंगिक विवाहों, एलजीबीटीक्यू समुदाय के दत्तक ग्रहण और अन्य नागरिक अधिकार जैसे मुद्दों पर गौर नहीं करने का अनुरोध किया है। केंद्र सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपने विवेक के आधार पर इस मसले पर फैसला करे। फिलहाल कोर्ट ने सुनवाई को आगे बढ़ा दिया है।

समलैंकिता को भारतीय धारा 377 के मुताबिक अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसे अपराध मुक्त करान के लिए याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान याचिकाकर्ता के ओर से अपराध मुक्त करने के लिए गुहार लगाई जा रही है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मेनेका गुरुस्वामी ने कहा कि लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल और ट्रांसजेंडर देश के संविधान और सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा पाने के अधिकारी हैं।

धारा 377 एलजीबीटी समुदाय को समान अवसर और सहभागिता से रोकता है। धारा 377 से लैंगिक अल्पसंख्यकों के राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों का हनन हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट को ऐसे लोगों के साथ न्याय करना चाहिए।

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