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SC ने पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाने से किया इंकार, कहा-व्यक्तिगत स्वतंत्रता का होगा उल्लंघन

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस बारे में डिटेल एफिटेविट सौंपने के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया है।

SC ने पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाने से किया इंकार, कहा-व्यक्तिगत स्वतंत्रता का होगा उल्लंघन

नई दिल्ली. देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सभी पोर्न वेबसाइट्स पर प्रतिबंध करने के निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एच.एल.दत्तू ने इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा ‘इस तरह का अंतरिम आदेश कोर्ट द्वारा नहीं दिया जा सकता। कोई कोर्ट आकर यह कह सकता है कि मैं एक एडल्ट हूं और आप मुझे मेरे कमरे के भीतर पोर्न देखने से कैसे रोक सकते हैं? यह संविधान के आर्टिकल 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। हालांकि, यह एक सीरियस मुद्दा है और कुछ कदम उठाए जाने चाहिए। देखते हैं कि केंद्र इस मसले पर क्या कदम उठाता है?’

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जानकारी के मुताबिक चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस बारे में डिटेल एफिटेविट सौंपने के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया है।आपको बता दें कि कोर्ट ने यह कमेंट इंदौर के वकील कमलेश वासवानी द्वारा दाखिल जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान किया।
इस जनहित याचिका में सभी पोर्न वेबसाइट्स को ब्लॉक करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि जब तक गृह मंत्रालय इस पर कोई कदम नहीं उठाता, तब तक सभी पोर्न साइट्स को ब्लॉक करने का अंतरिम आदेश जारी किया जाए।
याचिकाकर्ता के वकील विजय पंजवानी ने दलील दी कि बच्चों और महिलाओं के ज्यादातर अपराध पोर्न वीडियो से प्रभावित होकर किए जाते हैं। इंटरनेट कानूनों की गैरमौजूदगी लोगों को पोर्न देखने के लिए बढ़ावा देती है। 20 करोड़ से ज्यादा क्लीपिंग्स उपलब्ध हैं, जो इंटरनेट से सीधे डाउनलोड किए जा सकते हैं या सीडी में कॉपी किए जा सकते हैं।
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