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आधार कार्ड की वैधता पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले इन पांच जजों को कितना जानते हैं आप...?

आधार की वैधानिकता को लेकर चली आ रही लंबी बहस पर आज विराम लग गया। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने आधार की अनिवार्यता को लेकर आज फैसला सुना दिया।

आधार कार्ड की वैधता पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले इन पांच जजों को कितना जानते हैं आप...?
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आधार की वैधानिकता को लेकर चली आ रही लंबी बहस पर आज विराम लग गया। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने आधार की अनिवार्यता को लेकर आज फैसला सुना दिया। जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सरकारी कामों छोड़कर हर जगह से आधार कार्ड की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। आइए जानते हैं उन पांच जजों के बारे में जिन्होंने आधार कार्ड पर ऐतिहासिक फैसला दिया...
भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पांच जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे थे। 28 अगस्त 2017 को उन्होंने भारत के 45वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। उन्होंने पूर्व चीफ जस्टिस जेएस खेहर के रिटायर होने के बाद कार्यभार ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल 2 अक्टूबर, 2018 को समाप्त हो जाएगा। उनके कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले दिए गए हैं, जिसमें समलैंगिकता, आधार आदि प्रमुख है।
जस्टिस एके सीकरी का पूरा नाम अर्जन कुमार सीकरी है। उनका जन्म 7 मार्च 1954 को हुआ था। सीकरी ने सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर 12 अप्रैल 2013 को शपथ ली थी। इससे पहले उन्होंने पंजाब हाईकोर्ट और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने उन्हें 1977 में वकील के तौर पर नामित किया था जिसके बाद उन्होंने दिल्ली में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। इसके अलावा 1994-95 के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले भी दिए हैं। जस्टिस सीकरी इच्छा मृत्यु को सशर्त अनुमति देने का ऐतिहासिक फैसला देने वाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का भी हिस्सा रहे थे।
अजय माणिकराव खानविलकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं। उन्हें 29 मार्च 2000 को बॉम्बे हाईकोर्ट में एडिशनल जज के तौर पर नियुक्त किया गया था और 8 अप्रैल 2002 को पर्मानेंट जज बनाया गया। उसके बाद वे हिमांचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और उसके बाद 2013 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज बने। वहीं 13 मई 2016 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में चुना गया।
धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ को 13 मई 2016 को भारत के सुप्रीम कोर्ट में जज के रुप पर नियुक्त किया गया था। उनके पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। चंद्रचूड़ ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपने करियर की शुरुआत की और बाद में साल वे एडिशनल सोलिस्टर जनरल ऑफ इंडिया नियुक्त हुए थे। वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रहे और मई 2016 में वे सुप्रीम कोर्ट जज बने।
जस्टिस अशोक भूषण सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त होने से पहले केरल हाईकोर्ट के 31वें चीफ जस्टिस थे. उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जन्में अशोक भूषण ने 1979 में वकालत करना शुरू किया था और 24 अप्रैल 2001 को इलाहबाद हाईकोर्ट का जज बनाया गया और उन्होंने कई कमेटियों की अध्यक्षता भी की। उसके बाद भूषण केरल हाईकोर्ट के जज नियुक्त हुए और उन्हें 13 मई को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।

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