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पंजाब की बेटी ने रचा इतिहास, वकील से सीधा बनेंगी सुप्रीम कोर्ट की जज-जानें कौन हैं ये

पंजाब के जलंधर की रहने वाली इंदू मल्होत्रा पेशे से सुप्रीम कोर्ट की वकील है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश पर जज बनाई जाएंगी।

पंजाब की बेटी ने रचा इतिहास, वकील से सीधा बनेंगी सुप्रीम कोर्ट की जज-जानें कौन हैं ये
सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब कोई महिला वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनाई जाएंगी। पंजाब के जालंधर की रहने वाली इंदू मल्होत्रा पेशे से सुप्रीम कोर्ट की वकील हैं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की शिफारिश के बाद इंदू मल्होत्रा का सुप्रीम कोर्ट की जज बनना लगभग तय है, क्योंकि इंदू के नाम की सिफारिश किए जाने के बाद अब इस फैसले पर सिर्फ केंद्र सरकार की मुहर लगना बाकी है।
इंदू मल्होत्रा के सुप्रीम कोर्ट की जज बनाए जाने की सिफारिश से पंजाब को दोगुनी खुशी मिली है। इंदू मल्होत्रा जालंधर की भांजी और लुधियाना की बेटी हैं। उनकी मां जालंधर की बेटी थीं।

इंदू मल्होत्रा प्रोफाइल

इंदू मल्होत्रा के जालंधर निवासी मामा आरके तलवार ने बताया कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारी बहन की बेटी सुप्रीम कोर्ट की जज बनने जा रही हैं। उन्होंने ने बताया कि इंदू अक्सर उनके पास जालंधर आती रहती हैं।
उन्होंने बताया कि उनके बहनोई भी सुप्रीम कोर्ट में प्रेक्टिस करते थे और उनका भांजा और दो भांजियां भी कानूनविद् ही हैं। तलवार बताते हैं कि उनकी बहन की शादी मूल रूप से लुधियाना के पास बैरसाल के रहने वाले ओपी मल्होत्रा से हुई थी।
तलवार के मुताबिक उनके बहनोई बेंगलुरु में एक कंपनी में जीएम थे। चूंकि उनके बहनोई ने भी कानून की पढ़ाई कर रखी थी, तो 1961 में वो नौकरी छोड़कर दिल्ली शिफ्ट हो गए। यहां वो अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया एमसी स्टीवाट के संपर्क में आए और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी।
इंदू मल्होत्रा के मामा ने बताया कि इंदू की शुरुआती शिक्षा हालांकि, बेंगलुरु में ही हुई पर अपनी सेकेंडरी स्कूल और आगे की शिक्षा उन्होंने दिल्ली में पूरी की। इंदू तीन बहनों और एक भाई में सबसे छोटी हैं।
उनका भाई लॉस एंजलिस में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। उनकी बड़ी बहन हाउसवाइफ हैं। पर उनसे छोटी बहन इन्कम टैक्स एडवोकेट हैं। वो इन्कम टैक्स विभाग में उपायुक्त के पद पर भी रह चुकी हैं। तलवार ने बताया कि इंदू मल्होत्रा के पिता और माता का स्वर्गवास हो चुका है। अगर वे आज होते तो उनको भी अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व होता।
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