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सुप्रीम कोर्ट ने भी माना, मौलिक अधिकार है ''निजता का अधिकार''

9 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से माना की निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी माना, मौलिक अधिकार है

निजता का अधिकार, मौलिक अधिकार है सुप्रीम कोर्ट की 9 बेंचों की जजों ने सर्वसम्मति से आज यह फैसला सुनाया। इससे पहले इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 3 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है और यह संविधान के आर्टिकल 21 (जीने के अधिकार) के तहत आता है।

करीब एक पखवाड़े तक चली मैराथन सुनवाई में केंद्र सरकार व गुजरात, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, केरल आदि राज्यों के अलावा याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान, गोपाल सुब्रह्मण्यम आदि ने अपने पक्ष रखे।

केंद्र सरकार का कहना था कि निजता का अधिकार तो है लेकिन यह मौलिक अधिकार नहीं है। आधार का मामला इस केस से अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा हुआ था। इस फैसले से आधार की किस्मत नहीं तय होगी। आधार पर अलग से सुनवाई होगी। बेंच को सिर्फ संविधान के तहत निजता का अधिकार की प्रकृति और दर्जा तय करना था।

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