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सुप्रीम कोर्ट का आधार कार्ड पर फैसले से कैसे पड़ेगा आप प्रभाव, जानें

आधार कार्ड की वैधानिकता को चुनौती देने वाली 27 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जनवरी में शुरू हुई थी। इसके बाद करीब 38 दिन तक इस मामले की सुनवाई चली। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। आज इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अहम फैसला सुना सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का आधार कार्ड पर फैसले से कैसे पड़ेगा आप प्रभाव, जानें
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सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की वैधानिकता को चुनौती देने वाली 27 याचिकाओं पर जनवरी में सुनवाई शुरू हुई थी। इसके बाद करीब 38 दिन तक इस मामले की सुनवाई चली। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। आज इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अहम फैसला सुना सकती है।

याचिकाकर्ताओं ने उठाए यह सवाल

हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज के. पुट्टास्वामी समेत कई जाने-माने लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आधार योजना का विरोध किया. उनकी याचिका में यह तर्क दिया गया कि आधार कार्ड बनाने के लिए बायोमेट्रिक जानकारी लेना निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

वहीं आधार एक्ट में इसे वैकल्पिक रखा गया है। किसी नागरिक के लिए आधार बनवाना अनिवार्य नहीं है. लेकिन सरकार ने सभी योजनाओं का लाभ लेने से लेकर बैंक अकाउंट खोलने तक, हर जगह आधार को अनिवार्य कर दिया गया है। यानी एक तरह से लोगों को आधार कार्ड बनवाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार देश के नागरिकों की हर गतिविधि पर नज़र रखना चाहती है. याचिका में आधार कार्ड की सुरक्षा पर भी सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि आधार के आंकड़े सुरक्षित नहीं हैं। आधार के लिए जुटाई गयी बायोमैट्रिक जानकारी के लीक होने की लगातार खबरें सामने आती हैं. डाटा की सुरक्षा का सही बंदोबस्त नहीं है।

सरकार ने आधार अनिवार्य करने के लिए दिए यह तर्क

इस मामले पर सरकार ने याचिकाकर्ताओं की दलील का जवाब देते हुए कोर्ट को बताया कि आधार के आंकड़े पूरी तरह सुरक्षित हैं। निजता के हनन की बात पूरी तरह से गलत है। आधार से कल्याणकारी योजनाओं की रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में पहुंची है जिससे चोरी बंद हुई है।

सरकार ने कहा कि बैंक अकाउंट, इनकम टैक्स और वित्तीय लेन देन में आधार को अनिवार्य बनाने से काले धन पर लगाम लगेगी. अब तक करीब 120 करोड़ लोग आधार कार्ड बनवा चुके हैं और वे इससे खुश हैं। लोग एक देश एक पहचान में सराकार का समर्थन कर रहे हैं।

दलील सुनकर कोर्ट ने किए तीखे सवाल

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की। दलीलों को सुनने के बाद बेंच ने दोनो पक्षों से आधार कि अनिवार्यता पर कड़े सवाल किए। याचिकाकर्ताओं से सवाल आधार के ज़रिए कल्याणकारी योजनाओं का लाभ असल ज़रूरतमंदों को मिल रहा है।

इसमें क्या दिक्कत है? कोर्ट ने दूसरा सवाल यह पूछा कि क्या आप कहना चाहते हैं कि आपके जीवन में सरकार का कोई दखल न हो? ऐसा तभी मुमकिन है, जब कोई हिमालय में तपस्या करने चला जाए। कोर्ट ने पूछा कि क्या अब 120 करोड़ लोगों से जुटाई गई जानकारियों को नष्ट कर दिया जाए?

सरकार से कोर्ट ने पूछा सवाल

जब एक्ट में आधार को अनिवार्य नहीं रखा गया तो लोगों को आधार बनवाने के लिए मजबूर क्यों किया जा रहा है? लोग देश के कर्ज का पैसा लेकर के विदेश भाग जाते हैं।आधार का इस्तेमाल इसे कैसे रोक पाएगा? बायोमेट्रिक जानकारी की सुरक्षा को लेकर याचिकाकर्ताओं की चिंता का क्या जवाब है?

फैसले से पड़ेंगे यह प्रभाव

  • अगर कोर्ट बायोमैट्रिक जुटाने को गलत करार देती है तो आधार बनवाने कि प्रक्रिया रुक जायेगी।
  • अगर आधार को सरकारी योजनाओं में अनिवार्यता खत्म कर देता है तो वसरकार को फंड की चोरी रोकने और योजना का लाभ असल लोगों तक पहुंचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी।
  • अगर कोर्ट बैंक अकाउंट खोलने या मोबाइल नंबर लेने के लिए आधार की अनिवार्यता को गलत बताता है, तो आधार के ज़रिए कई तरह के अपराध पर काबू पाने की सरकार की कोशिश असफल हो जाएगी।

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