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SC ने महाराष्ट्र में डांस बार फिर से खोलने का रास्ता किया साफ, हटाए कड़े प्रतिबंध

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र में डांस बार को लाइसेंस दिए जाने और उन्हें फिर से खोलने का रास्ता साफ करते हुए 2016 के कानून के कुछ कड़े प्रावधानों को खारिज कर दिया।

SC ने महाराष्ट्र में डांस बार फिर से खोलने का रास्ता किया साफ, हटाए कड़े प्रतिबंध

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र में डांस बार को लाइसेंस दिए जाने और उन्हें फिर से खोलने का रास्ता साफ करते हुए 2016 के कानून के कुछ कड़े प्रावधानों को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ‘‘नैतिकता की अपनी अवधारणा के साथ सामाजिक नियंत्रण' का काम नहीं कर सकती है। उच्चतम न्यायालय ने 2016 कानून के कुछ प्रावधानों को खारिज करते हुए कहा कि उसे उम्मीद है कि राज्य सरकार अब ‘‘खुले दिमाग' से लाइसेंस जारी करने के आवेदनों पर विचार करेगी ताकि निश्चित स्थानों पर नृत्य प्रदर्शन में पूरी तरह पाबंदी नहीं हो। 2016 के कानून में डांस बार के लाइसेंस और कामकाज पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे।

न्यायमूर्ति ए. के. सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि 2005 में महाराष्ट्र पुलिस कानून में संशोधन के बाद डांस बार को कोई लाइसेंस जारी नहीं किया गया और 2016 का कानून ‘‘विनियामक प्रकृति का प्रतीत होता है लेकिन डांस बार पर इसका वास्तविक परिणाम और प्रभाव प्रतिबंधकारी है।'

शीर्ष न्यायालय ने महाराष्ट्र में होटल, रेस्तरां और बार रूम्स में अश्लील नृत्य पर प्रतिबंध और महिलाओं की गरिमा की सुरक्षा (वहां काम करने वाली) कानून, 2016 के एक शर्त को खत्म कर दिया। इस शर्त के मुताबिक डांस बार में सीसीटीवी कैमरे लगाया जाना अनिवार्य था। अदालत ने कहा कि यह ‘‘पूरी तरह अनुपयुक्त और निजता का हनन' है।

बहरहाल, इसने उस शर्त को बरकरार रखा जिसमें डांस का समय शाम छह बजे से रात साढ़े 11 बजे तक तय किया गया है। अदालत ने कहा, ‘‘हम इसे स्पष्ट रूप से अनुचित नहीं पाते हैं।'

डांस बार मालिकों और कर्मचारियों को राहत देते हुए अदालत ने कहा कि ‘‘विनियमन' हो सकता है लेकिन ‘‘पूरी तरह प्रतिबंध नहीं हो सकता।' इसने उस नियम को भी खारिज कर दिया जिसमें बार में शराब नहीं परोसी जा सकती है।

न्यायमूर्ति ए. के. सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा, ‘‘यह समझा जाना जरूरी है कि कुछ कार्यों को समाज अनैतिक मानता है। इसमें जुआ, वेश्यावृत्ति आदि शामिल हैं। यह भी गौर किया जाना चाहिए कि किसी भी समाज में नैतिकता के मापदंड समय के साथ बदलते हैं।'

महाराष्ट्र में डांस बार खोलने की अनुमति देने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले का सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। उच्चतम न्यायालय ने फैसले में कहा कि डांस बार के लिए ‘‘विनियमन' हो सकता है लेकिन इस पर ‘‘पूरी तरह प्रतिबंध' नहीं लगाया जा सकता।

साथ ही अदालत ने 2016 के कानून के कुछ प्रावधानों को दरकिनार कर दिया, जिसमें लाइसेंसिंग एवं कामकाज को लेकर प्रतिबंध लगाए गए थे। भारतीय बार गर्ल्स संघ की अध्यक्ष वर्षा काले ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को बड़ी ‘‘जीत' करार दिया है। वह बार डांसर्स के हितों की लड़ाई लड़ती रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मामले में कई बार जीते (विभिन्न अदालतों में) लेकिन यह जीत बड़ी है।'

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि राज्य के अधिकारी डांस बार को लाइसेंस जारी करना शुरू कर देंगे ताकि हजारों बार डांसर वापस लौट सकें और अपनी जिंदगी शुरू कर सकें।'
काले ने कहा कि डांस बार में उस समय 75 हजार से अधिक महिलाएं रोजगार पाती थीं जब राज्य सरकार ने 2005 में कथित तौर पर अश्लीलता को बढ़ावा देने का अरोप लगाते हुए उन्हें बंद करने का निर्णय किया था।
उन्होंने दावा किया कि 40 हजार महिलाओं ने जहां यह पेशा छोड़ दिया और जीविका के लिए दूसरे काम करने लगीं वहीं करीब 35 हजार महिलाएं अब भी विभिन्न होटलों में वेटर और गायिका का काम करती हैं।
पूर्व नौकरशाह एवं सामाजिक कार्यकर्ता आभा सिंह ने उच्चतम न्यायालय के आदेश को ‘‘प्रगतिशील' बताया और कहा कि राज्य सरकार डांस बार को विनियमित कर सकती है लेकिन उसे पूरी तरह नहीं रोक सकती। डांस बार फिर से खोलने के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले मनजीत सिंह सेठी ने भी निर्णय का स्वागत किया।
डांस बार मालिक संगठन के पूर्व अध्यक्ष सेठी ने कहा कि इससे हजारों बार डांसर को गरिमामय तरीके से जीने में सहयोग मिलेगा। भाजपा के स्थानीय नेता प्रेम शुक्ला ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर राज्य सरकार कानूनी विशेषज्ञों से राय लेगी।
वहीं महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि डांस बार की आड़ में चलने वाली किसी भी ‘अवैध गतिविधि' को वह रोकेगी। राज्य के गृह मंत्री रंजीत पाटिल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय डांस बार पर राज्य के कई प्रावधानों पर सहमत हुआ है, जिसमें समय की पाबंदी और बालाओं पर पैसे नहीं लुटाना जैसे प्रावधान शामिल हैं।
गृह मंत्री (शहरी) ने कहा, ‘‘राज्य सरकार को अदालत के फैसले की लिखित प्रति नहीं मिली है। आदेश की प्रति मिलते ही हम इसका अध्ययन करेंगे और आगे क्या करना है, इस पर निर्णय करेंगे।'
पाटिल ने कहा, ‘‘हम अदालत के फैसले का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और उसका सम्मान करते हैं। हम निगरानी बनाए रखेंगे ताकि डांस बार की आड़ में अवैध गतिविधियां नहीं चल सकें।'
शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि भाजपा नीत राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। डांस बार को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले पर वकीलों के एक धड़े ने जहां इसकी प्रशंसा की वहीं एक अन्य वर्ग ने इसे राज्य सरकार के लिए झटका बताया।
बंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एफ आई रिबेलो ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने डांस बार पर अनुचित प्रतिबंधों को खत्म कर ठीक काम किया है। डांस बार संगठन की तरफ से मामले में प्रतिनिधित्व कर चुके वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने फैसले का स्वागत किया।
वरिष्ठ वकील और महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता श्रीहरि अने ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर ‘‘व्यावहारिक और संतुलित' रूख अपनाया। बहरहाल, वकील उदय वारुंजीकर का मानना है कि उच्चतम न्यायालय को 2016 के कानून के सभी प्रावधानों को बरकरार रखना चाहिए था।
वहीं, विपक्षी दल राकांपा ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और डांस बार मालिकों की मिलीभगत के कारण राज्य में डांस बार फिर से खोलने का रास्ता साफ हुआ है। साथ ही पार्टी ने कहा कि जब वह राज्य में सत्ता में आएगी तो इन पर फिर से प्रतिबंध लगवाएगी।
राकांपा ने आरोप लगाए कि मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस और बार मालिकों के संगठन की बैठक मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘वर्षा' में हुई जिस कारण इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में सरकार की स्थिति ‘‘कमजोर' पड़ गई।
राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने दावा किया कि एक अन्य बैठक महापौर के बंगला (दादर में) पर ढाई वर्ष पहले इसी मुद्दे पर हुई थी जिसमें भाजपा के कुछ नेताओं और बार मालिकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर हम लोगों के पास जाएंगे और हमारी पार्टी के सत्ता में आने पर हम फिर से डांस बार पर प्रतिबंध लगाएंगे।' उनकी पार्टी के सहयोगी और राज्य विधान परिषद् में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने राज्य सरकार से कहा कि तुरंत कानूनी कदम उठाएं ताकि राज्य में फिर से डांस बार नहीं खुल पाएं। राकांपा की महिला शाखा की प्रमुख चित्रा वाघ ने इस फैसले को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और कहा कि ‘‘इसका स्वागत नहीं किया जा सकता है।'
शिवसेना ने इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि डांस बार पर राज्य सरकार पुख्ता कानून बनाने में विफल रही जिसके कारण ऐसा फैसला आया। शिवसेना के वरिष्ठ नेता अनिल परब ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्चतम न्यायालय बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार नहीं रख पाया क्योंकि 2016 के कानून का उद्देश्य सही था।
उन्होंने कहा कि विधेयक को जब राज्य विधानसभा में रखा गया तो शिवसेना ने स्पष्ट किया था कि इसे न्यायिक समीक्षा में खरा उतरना चाहिए। परब ने कहा, ‘‘विधेयक को पुख्ता नहीं बनाया जाना राज्य सरकार की विफलता है।'
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