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सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पूराने कानून की धारा 497 को दिया असंवैधानिक करार, कहा- पति सिर्फ पति है मालिक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने व्याभिचार कानून को असंवैधानिक करार दिया है। इस मामले पर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि पति पत्नी का मालिक नहीं होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पूराने कानून की धारा 497 को दिया असंवैधानिक करार, कहा- पति सिर्फ पति है मालिक नहीं
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सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने व्याभिचार कानून को असंवैधानिक करार दिया है। इस मामले पर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि पति पत्नी का मालिक नहीं होता है। पति पत्नी के रिश्ते की खूबसूरती होती है मैं, तुम और हम। समानता के अधिकार के तहत पति पत्नी को बराबर अधिकार है। महिला को समाज के हिसाब से चलने के लिए नहीं कहा जा सकता। इस फैसले के बाद अब दूसरे व्यक्ति की पत्नी के साथ विवाह के बाद यौन संबंध बनाना अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। जब तक महिला आत्महत्या के लिए मजबूर न हो जाए।

आईपीसी की धारा-497 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कानून का समर्थन किया है। सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से एएसजी पिंकी आंनद ने कहा था कि अपने समाज में हो रहे विकास और बदलाव को लेकर कानून को देखना चाहिए न कि पश्चिमी समाज के नजरिए से।

क्या है धारा 497

इस धारा के मुताबिक, दूसरे व्यक्ति की पत्नी के साथ विवाह के बाद यौन संबंध बनाने पर सिर्फ पुरुष के लिए सजा का कानून है, लेकिन महिलाओं को ऐसे अपराध में सजा से मुक्त रखा गया है। अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी शादीशुदा महिला से उसकी इच्छा के अनुसार शारीरिक संबंध बनता है तो उस महिला का पति धारा 497 (व्यभिचार) के तहत उस पुरुष के खिलाफ केस दर्ज करवा सकता है। लेकिन महिला का पति अपनी पत्नी के खिलाफ केस दर्ज नहीं करवा सकता है। इतना ही नहीं आरोपी पुरुष की पत्नी भी महिला के खिलाफ केस दर्ज नहीं करवा सकती है। इस कानून के अनुसार आरोपी पुरुष के खिलाफ भी महिला का पति ही केस दर्ज करवा सकता है। अगर पुरुष पर महिला से अवैध संबंध का आरोप साबित होता है तो पुरुष को ज्यादा से ज्यादा पांच साल की सजा हो सकती है।

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