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सुप्रीम कोर्ट ने दिया कर्नाटक को झटका

कावेरी बेसिन में कर्नाटक का 32 हजार वर्ग किलोमीटर और तमिलनाडु का 44 हजार वर्ग किलोमीटर का इलाका शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया कर्नाटक को झटका
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कावेरी जल विवाद में कर्नाटक की समीक्षा याचिका को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्टूबर 2016 को कर्नाटक को यह निर्देश दिया था कि शीर्ष न्यायालय के अगले आदेश तक राज्य को तमिलनाडु को कावेरी नदी के जल से दो हजार क्यूसेक पानी की आपूर्ती जारी रखनी होगी।

उल्लेखनीय है कि 4 जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल की अपील पर रोजाना सुनवाई की जाएगी पर तबतक के लिए 2016 का आदेश प्रभावी होगा।

क्या है कावेरी जल विवाद?

कावेरी नदी का उद्गम स्थल कर्नाटक के कोडागु जिले में है। ये नदी लगभग साढ़े सात सौ किलोमीटर लंबी है और कुशालनगर, मैसूर, श्रीरंगापटना, त्रिरुचिरापल्ली, तंजावुर और मइलादुथुरई जैसे शहरों से होकर गुजरती है। ये नदी तमिलनाडू में बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
कावेरी बेसिन में कर्नाटक का 32 हजार वर्ग किलोमीटर और तमिलनाडु का 44 हजार वर्ग किलोमीटर का इलाका शामिल है। दोनों ही राज्यों का ये कहना है कि उन्हें सिचाईं के लिए पानी की जरुरत है और जिसके चलते दोनों राज्यों के बीच लड़ाई जारी है।
कर्नाटक का कहना है कि बारिश कम होने की वजह से कावेरी नदी का जलस्तर घट गया है और इसलिए वो तमिलनाडू को पानी नहीं दे सकते। इसको लेकर तमिलनाडू ने शीर्ष न्यायालय के दरवाजे खटखटाए। तमिलनाडू का कहना है कि राज्य को हर हाल में पानी चाहिए जो कि उनका हक है, वरना तमिलनाडू के लाखों किसीन बर्बाद हो जाएंगे।
वहीं दूसरी ओर कर्नाटक का कहना है कि कावेरी का ज्यादातर पानी बेंगलूरू और अन्य शहरों में पीने के लिए इस्तेमाल हो रहा है इसलिए सिंचाई के लिए पानी बच ही नहीं रहा है।

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