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अब हाइवे पर नहीं बिकेगी शराब, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट में ''अराइव सेफ'' एनजीओ ने पिटीशन लगाई थी।

अब हाइवे पर नहीं बिकेगी शराब, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी हाइवे पर शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने नेशनल हाइवे या आस-पास मौजूद सभी शराब की दुकानों के लाइसेंस रिन्यू ना करने के भी आदेश दिए हैं। हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा कि हाईवे पर मौजूद दुकानों का जितनी तारीख तक लाइसेंस है, तब तक वे ऑपरेट कर सकते हैं। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली एपेक्स कोर्ट बेंच ने कहा कि शराब विक्रेता 31 मार्च 2017 तक हाइवे पर शराब की बिक्री कर सकते हैं । इसके बाद उनके लाइसेंस का नवीकरण नहीं किया जाएगा।
31 मार्च 2017 तक का मिला समय
बुधवार को ही कोर्ट ने संकेत दे दिए थे कि हाइवे पर मौजूद शराब की दुकानों को बंद किया जा सकता है। कोर्ट के मुताबिक, यह फैसला सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है, क्योंकि अक्सर देखने को मिलता है कि रास्ते में शराब की दुकानों को देख वहां से गुजर रहे लोगों का मन विचलित होता है। जो लोग शराब पी लेते हैं उनके एक्सिडेंट का खतरा भी बढ़ जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हाईवे पर और उसके करीब स्थिति शराब की दुकानों के लाइसेंस बंद होने चाहिए। हालांकि अदालत ने इन दुकानों को उनके मौजूदा लाइसेंस की अवधि तक चलाए जाने की छूट दी है। कोर्ट ने कहा कि हाईवे पर शराब की सभी दुकानों के लाइसेंस 31 मार्च 2017 के फिर से जारी न हों।
राज्य सरकारों की हुई खिंचाई
‘arrive safe’ नाम की एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली थी। इसमें कहा गया था कि हर साल 1.42 लाख लोगों की रोड एक्सीडेंट के चलते मौत हो जाती है। इनमें से ज्यादातर की मौत शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण होती है। एनजीओ ने कहा था कि हाईवे पर आसानी से शराब मिलना ड्रंक ड्राइविंग की वजह बनता है। आपको बता दें कि कोर्ट ने हाइवे पर शराब बिक्री को लेकर पहले भी नाराजगी जाहिर की थी। हाल ही में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राजमार्गों से शराब की दुकान हटाने की केंद्र की नीति पर अमल न होने को लेकर राज्य सरकारों, खासकर पंजाब और पुडुचेरी प्रशासन पर तल्ख टिप्पणी की थी। कोर्ट ने केंद्र की नीति को सही ठहराते हुए कहा था कि वह देश भर के हाइवे से शराब की दुकानों को हटाने के लिए आदेश भी दे सकती है। कोर्ट ने राज्य सरकारों की खिंचाई करते हुए कहा था कि वे शराब का लाइसेंस देकर पैसे बना रही हैं, लेकिन लोगों की जिंदगी और सुरक्षा जैसी जरूरी बातों को दरकिनार कर रही हैं।
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