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जजों की सैलरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा ये एक सवाल, मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह संवैधानिक न्यायालयों के जजों के वेतन में वृद्धि करने के लिए कदम उठाना भूल गया है

जजों की सैलरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा ये एक सवाल,  मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह संवैधानिक न्यायालयों के जजों के वेतन में वृद्धि करने के लिए कदम उठाना भूल गया है, सातवें वेतन आयोग लागू हो जाने के बाद भी जजों का वेतन नौकरशाहों के वेतन से कम है।

चेलामेश्वर और एस अब्दुल नजीर की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा को कहा सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन के बारे केन्द्र सरकार का क्या विचार है।
सातवें वेतन आयोग लागू होने के बाद केंद्र सरकार के कर्मचारियों का वेतन जिस अनुपात में बढ़ा है वैसे ही जजों के वेतन नहीं बढ़ा है। सातवे वेतन आयोग की सिफारिशों लागू होने के बाद भी उच्च अधिकारियों, नौकरशाह, कैबिनेट सचिव, को भत्ते के अलग 2.5 लाख रुपए सैलरी मिलती है।
न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीशों को 9 0000 रुपये प्रति माह सैलरी मिलती है। एचसी न्यायाधीशों को प्रति माह 80,000 रुपये सैलरी और भत्ता मिलता है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्टाफ और अधिकारियों को वॉशिंग अलाउंस देने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये सवाल पूछा कि जजों के सैलरी बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव मार्च में ही लाया गया था, लेकिन अभी यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। जजों के वेतन में बढ़ोतरी संसद से बिल पास होने के बाद ही सम्भव हो सकती है।
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