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क्या महिलाओं के पास तीन तलाक पर न कहने का है अधिकार: SC

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीमकोर्ट को 14 अप्रैल 2017 को पास किया गया संकल्पपत्र भी दिखाया जिसमें कहा गया कि ट्रिपल तलाक पाप है और इसको कहने वाले लोगों का समुदाय को बहिष्कार करना चाहिए।

क्या महिलाओं के पास तीन तलाक पर न कहने का है अधिकार: SC
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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक मामले पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश खेहर ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एडवोकेट कपिल सिब्बल से सवाल किया कि क्या ट्रिपल तलाक में मुस्लिम महिलाओं के पास ये अधिकार है कि वो ट्रिपल तलाक को स्वीकार न करें?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एआईएमपीएलबी से सवाल किया कि क्या बोर्ड की सलाह का पालन काजी द्वारा ग्राउंड लेवल पर किया जाएगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल पर बोर्ड के वकील यूसुफ मुच्छल ने कोर्ट को जवाब देते हुए कहा कि सभी काजी बोर्ड की एडवाईजरी को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बोर्ड सभी सुझावों को नम्रता पूर्वक स्वीकार करता है और वो इस मसले पर गौर करेगा।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीमकोर्ट को 14 अप्रैल 2017 को पास किया गया संकल्पपत्र भी दिखाया जिसमें कहा गया कि ट्रिपल तलाक पाप है और इसको कहने वाले लोगों का समुदाय को बहिष्कार करना चाहिए।
गौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अदालत को बताया कि मुस्लिम समुदाय में शादी एक कांट्रैक्ट है जिसमें कि महिलाएं अपने हितों और अपनी मर्यादा की रक्षा के लिए उसमें कुछ शर्तें रख सकती हैं।

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