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सु्प्रीम कोर्ट ने लगाई लिव इन रिलेशनशिप पर मोहर, कहा- पति-पत्नि भी किसी के साथ रह सकते हैं लिव इन में

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए लिव इन रिलेशन को वैध करार दिया है। यहीं नहीं कोर्ट ने कहा कि अगर किसी कपल की शादी के बाद भी लड़के या लड़की दोनो में से किसी की भी उम्र शादी योग्य नहीं है तो भी वह लिव इन रिलेशन में रह सकते है।

सु्प्रीम कोर्ट ने लगाई लिव इन रिलेशनशिप पर मोहर, कहा- पति-पत्नि भी किसी के साथ रह सकते हैं लिव इन में
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लिव इन रिलेशनशिप को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत सु्प्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप के एक मामले की सुनवाई करते हुए यह बड़ा फैसला दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में लिव इन रिलेशन को वैध करार दिया है। यहीं नहीं कोर्ट ने कहा कि अगर किसी कपल की शादी के बाद भी लड़के या लड़की दोनो में से किसी की भी उम्र शादी योग्य नहीं है तो भी वह लिव इन रिलेशन में रह सकते है।

कोर्ट ने कहा कि इससे उनकी शादी में कोई असर नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बड़े ही सख्त लहजे में कहा कि कोई भी किसी से अपने जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं छीन सकता।

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चाहे फिर वह कोई कोर्ट हो, कोई संस्था या संगठन ही क्यों ना हो। कोर्ट ने कहा कि किसी को भी अधिकार नहीं पहुंचता की वह किसी को अपनी पंसद से शादी करने से रोक सके।

कोर्ट ने कहा कि अगर कोई ऐसा करता है तो उसे कोर्ट के फैसले की अवमानना के तौर पर देखा जाएगा। और उसके खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाही की जाएगी।

जाने क्या है पूरा मामला

दरअसल अप्रैल 2017 में केरल की एक 19 साल की लड़की ने 20 साल के एक लड़के से शादी कर ली थी। जिसके बाद लड़की के पिता ने लड़के पर अपनी लड़की के अपहरण का मामला दर्ज करा दिया था।

जब यह मामला केरल हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंचा तो कोर्ट ने लड़के की उम्र शादी योग्य नहीं होने के चलते लड़की को उसके पिता के पास वापस भेजने का फैसला सुनाया था।

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जिसके बाद लड़के की तरफ से पक्षकारों ने केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए लिव इन रिलेशन को लेकर यह अहम फैसला सुनाया हैं।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने दलील दी की दोनो की शादी हिंदू धर्म के अनुसार हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत एक शून्य विवाह नहीं है। इसलिए इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता। और ऐसे में केवल लिव इन ही एक मात्र विकल्प है।

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