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सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया केस की एसआईटी से जांच को किया खारिज, जानिए जस्टिस लोया कौन है, कैसे हुई मौत

जस्टिस लोया की मौत को लेकर देश की सियासत में हलचल मच गई है, वहीं सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई चल रही है। लोया मौत को लेकर एसआईटी से स्वतंत्र जांच की मांग की है और इसके लिए कई याचिकाएं भी डाली गई है। वहीं कोर्ट ने लोया मौत मामले की सुनावाई पूरी कर ली थी।

सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया केस की एसआईटी से जांच को किया खारिज, जानिए जस्टिस लोया कौन है, कैसे हुई मौत
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जस्टिस लोया की मौत को लेकर देश की सियासत में हलचल मच गई है, वहीं सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई चल रही है। लोया मौत को लेकर एसआईटी से स्वतंत्र जांच की मांग की है और इसके लिए कई याचिकाएं भी डाली गई है।

वहीं कोर्ट ने लोया मौत मामले की सुनावाई पूरी कर ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी की जांच को खारीज कर दिया है और कहा है कि इस केस का कोई आधार नहीं है।

जस्टिस लोया की मौत का मामला

1 दिसंबर 2014 नवंबर को सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया की मौत नागपुर में हो गई थी। जज लोया अपने कलीग की बेटी की शादी में जा रहे थे, तब आचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई थी।

बीते साल नंवबर में जज लोया की बहन ने उनकी मौत पर शक जाहिर किया था और इसके साथ ही सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के तार इस मामले से भी जु़ड़े नजर आ रहे है। सूत्रों को मुताबिक यह सुचना सामने आई थी कि जज लोया के परिवार को 100 करोड़ की रिश्वत देने की कोशिश की थी।

महारष्ट्र सरकार ने स्वतंत्र जांच को लेकर जताया विरोध

महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में कहा है कि स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाएं राजनीति से जुड़ी हैं और किसी एक शख्स को निशाने पर रखकर दायर की गई हैं। वहीं, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जस्टिस लोया मामले में अब तक जिस तरह का घटनाक्रम हुआ, उससे निष्पक्ष जांच की जरूरत बढ़ गई है।

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4 जजों ने सुनवाई पर उठाए सवाल

इस दौरान उन्होंने कहा था कि जस्टिस लोया का केस किसी सीनियर जज के पास जाना चाहिए था, इस केस को जूनियर जज की बेंच के पास भेजा गया था। इसके बाद जस्टिस अरुण मिश्रा ने इस केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। अब इस केस की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच कर रही है। इसमें जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी हैं।

बता दें कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस को 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की ट्रायल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और सोहराबुद्दीन शेख के केस को एक साथ जोड़ दिया था।

पहले इस केस की सुनवाई जज जेटी उत्पत कर रहे थे, लेकिन 2014 में अचानक उनका तबादला कर दिया गया था। फिर केस की सुनवाई जज बीएच लोया के हाथों में दे दिया था।

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, राजस्थान के बिजनेसमैन विमल पाटनी, गुजरात पुलिस के पूर्व चीफ पीसी पांडे, एडीजीपी गीता जौहरी, गुजरात पुलिस के ऑफिसर अभय चुडासम्मा और एनके अमीन को बरी किया जा चुका है।

पुलिस अफसरों समेत कुल 23 आरोपियों के खिलाफ अभी भी जांच चल रही है।

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