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SC में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए होगी सुनवाई, केंद्र को नोटिस जारी

अब कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा।

SC में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए होगी सुनवाई, केंद्र को नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट में जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के लिए जो याचिका दायर की गई थी उसे कोर्ट ने स्वीकार लिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी कर दिया है जाकी सरकार भी अपना पक्ष रख सके।

इस याचिका में अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को दिए जा रहे 'स्पेशल ग्रांट' को चुनौती दी गई है। साथ ही चिका में कहा गया है कि वहां से धारा 370 हटाई जाए और वहां के अलग संविधान को भी अघोषित किया जाए।

पिछले कई सालों से बीजेपी और आरएसएस जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। इस अनुच्छेद के अनुसार जम्मू कश्मीर सरकार अपने निवासियों के बारे में निर्णय ले सकता है।

जबकि इस याचिका के अनुसार यह अनुच्छेद तभी तक वैध था जब तक संविधान सभा का आस्तित्व था, वहां की संविधान सभा को 26 जनवरी, 1957 में भंग कर दिया गया था।

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पीठने इस याचिका पर केन्द्र से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 11 अप्रैल के अपने फैसले में अनुच्छेद 370 को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दी थी।

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अदालत ने कहा था कि इसमें अब कुछ भी शेष नही बचा है क्योंकि शीर्ष अदालत इस मुद्दे पर पहले ही एक याचिका खारिज कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाली कुमारी विजयलक्ष्मी झा का दावा है कि अदालत के समक्ष उठाया गया मुद्दा न्यायालय में आये मामले से अलग है।

उन्होंने दलील दी कि अनुच्छेद 370 अस्थाई व्यवस्था थी और 1957 में राज्य की संविधान सभा के भंग होने के साथ ही यह कालातीत हो गई। याचिका में कहा गया है कि राज्य संविधान सभा के भंग होने और उसके संविधान को भारत के राष्ट्रपति, संसद या भारत सरकार की ओर से मंजूरी नहीं मिलने के बावजूद अनुच्छेद 370 को जारी रखना 'हमारे संविधान की मूल संरचना के साथ धोखाधड़ी है।'

जुलाई, 2014 में उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जा को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए उन्हें उच्च न्यायालय जाने के लिये कहा था। गौरतलब है की सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका ऐसे समय में दायर की गई है जब देश में अनुच्छेद 35A को लेकर तीखी बहस चल रही है। हाल ही में नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला ने भी कहा है कि अगर अनुच्छेद 35A को हटाया जाता है, तो विद्रोह पैदा हो जाएगा।

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