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पठानकोट के बाद चुप नहीं बैठे, उठाए जरूरी कदम: लांबा

लांबा ने कहा कि सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी डीएससी के पास ही है।

पठानकोट के बाद चुप नहीं बैठे, उठाए जरूरी कदम: लांबा
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नई दिल्ली. पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले के बाद से लेकर आज तक नौसेना ने अपने सभी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को चाक-चौबंद बनाने के लिए कई जरूरी कदम उठाएं हैं, जिससे इस तरह की किसी भी घटना से बचा जा सके। हमले के बाद रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के अलावा नौसेना और थलसेना के सभी अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को एक व्यापक समीक्षा करने का निर्णय लिया था। जिससे आतंकी इन ठिकानों को आसानी से निशाना न बना सके। यह जानकारी यहां शुक्रवार को नौसेना दिवस से पूर्व में आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में नौसेनाप्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने हरिभूमि द्वारा इस बाबत पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में दी।
सुरक्षा पुख्ता करने को उठाए कदम
एडमिरल लांबा ने कहा कि पठानकोट हमले के बाद रक्षा मंत्रालय ने पूर्व उप-सेनाप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फिलिप कंम्पोज की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। जिसे सेनाआें (नौसेना, थलसेना, वायुसेना) के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के सुरक्षा हालात की समीक्षा कर मंत्रालय को विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी थी। रिपोर्ट बीते मई के महीने में दे दी गई और उस पर दिशानिर्देश नवंबर महीने में सेना मुख्यालयों को जारी किए गए हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा दिशानिर्देश जारी करने में हुई देरी को लेकर एडमिरल लांबा ने सीधे कुछ न कहते हुए ये कहा कि इस दौरान बीते छह महीने से अधिक के समय के बीच हम चुप नहीं बैठे थे। हमने नौसेना के जितने अहम प्रतिष्ठान, नौसैन्यअड्डे और नौसैन्य गोदियां हैं। उनकी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मंत्रालय के समक्ष मामले उठाए और उन पर काम करना शुरू किया। यह एक सतत प्रक्रिया है। इसलिए यह कहना कि रिपोर्ट सौंपे जाने के कई महीने बीतते के बाद भी कुछ नहीं हुआ, गलत होगा। हमने इन जगहों पर कैमरे और नए इलेक्ट्रिक सेंसर्स लगाने का काम किया। सभी जगहों पर सुरक्षा को बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का काम चल रहा है। लांबा ने कहा कि कंम्पोज समिति ने नौसेना के सभी अहम सुरक्षा प्रतिष्ठानों का दौरा कर वहां कीसुरक्षा स्थिति का आकलन किया था। इसमें नौसेना के गोपनीय (क्लासीफाइड) माने जाने वाले ए, बी, सी श्रेणी के अहम प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। यहां बता दें कि हरिभूमि ने 1 दिसंबर को इस बाबत ‘सुरक्षा प्रतिष्ठानों को आतंकी हमलों से बचाने के लिए जारी हुए दिशानिर्देश’ शीर्षक एक खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
कारगर है डीएससी की भूमिका
नौसेना, वायुसेना और थलसेना के प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तैनात रक्षा सुरक्षा कोर (डीएससी) के जवानों की जगह पर किसी अन्य फोर्स की तैनाती, डीएससी की भूमिका, कार्य समीक्षा को लेकर एडमिरल लांबा ने कहा कि डीएससी अपना काम कर रही है। अगर हम पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के आलोक में चीजों को देखें तो जो उस दल का मुख्य नेता था और जिसने अपने प्राणों का बलिदान दिया, एक डीएससी का जवान ही था। वो एक काम कर रहे हैं, उनकी एक भूमिका है, जिसे वो निभा रहे हैं। इसके अलावा वो यह भी देख रहे हैं कि डीएससी को कैसे भविष्य में ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके। इसमें डीएससी की जगह पर एक अन्य विकल्प की आवश्यकता का पक्ष भी शामिल है। गौरतलब है कि पठानकोट हमले के बाद सेनाआें के महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के काम की जिम्मेदारी डीएससी से लेकर किसी अन्य फोर्स को दिए जाने का मसला भी उठा था। अभी इन तमाम जगहों पर सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी डीएससी के पास ही है।
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