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अयोध्या विवाद: पूजा-अर्चना के मौलिक अधिकार को लागू करवाने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे स्वामी

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली एक पीठ ने स्वामी की याचिका पर विचार किया।

अयोध्या विवाद: पूजा-अर्चना के मौलिक अधिकार को लागू करवाने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे स्वामी
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भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आज उच्चतम न्यायालय का रूख कर राम जन्म भूमि पर पूजा अर्चना के अपने मूल अधिकार को लागू कराने संबंधी अपनी याचिका पर फौरन सुनवाई करने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि स्वामी के आग्रह पर ही बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि विवाद के संवेदनशील मामले की सुनवाई में तेजी लाई गई है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली एक पीठ ने स्वामी की याचिका पर विचार किया।

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इस याचिका में सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दलील दी है कि दीवानी वाद के प्रतिद्वंद्वी पक्षों के संपत्ति का अधिकार की तुलना में वहां पूजा अर्चना का उनका मूल अधिकार अधिक महत्व रखता है। केंद्र का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता अमन सिन्हा ने किया।

इससे पहले सीजेआई और न्यायमूर्ति अशोक भूषण तथा एसए नजीर की एक विशेष पीठ ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में हस्तक्षेप करने की श्याम बेनेगल और तीस्ता सीतलवाड़ जैसे कार्यकर्ताओं की इन आशाओं पर पानी फेर दिया था। इसने मुख्य मामले में हस्तक्षेप के लिए स्वामी को भी इजाजत नहीं दी थी।

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हालांकि पीठ ने स्वामी की यह दलील स्वीकार कर ली कि उन्होंने मामले में हस्तक्षेप की मांग नहीं की है, बल्कि अयोध्या में राम जन्म भूमि पर पूजा अर्चना के अपने मूल अधिकार को लागू कराने का अनुरोध करते हुए एक अलग रिट याचिका दायर की है।

स्वामी ने कहा था कि मैंने एक रिट याचिका दायर कर कहा है कि पूजा अर्चना करने का मेरा एक मूल अधिकार है और यह संपत्ति का अधिकार की तुलना में श्रेष्ठतर अधिकार है।

पीठ ने कहा था कि स्वामी की रिट याचिका का निपटारा उपयुक्त पीठ कानून के मुताबिक करेगी। स्वामी ने पूजा अर्चना के अपने मूल अधिकार को लागू कराने के लिए अपनी याचिका फौरी आधार पर सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

इनपुट- भाषा

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