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सुब्रमण्यम स्वामी ने GST पर फिर साधा निशाना, भाजपा की जमकर की आलोचना

सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने टि्वटर अकांउट से टि्वट कर लिखा है कि GST प्रणाली ढहने के करीब है। उन्होंने लिखा कि जमा राशि के रिफंड ना होने के कारण व्यापारी सड़को पर उतर सकते है। उन्होंने आगे लिखा है कि व्यापारियों द्वारा जमा राशि से ICICI और HDFC बैंक फल-फूल रहे है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने GST पर फिर साधा निशाना, भाजपा की जमकर की आलोचना
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बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बार फिर गॅुडस एंड सर्विस (GST) को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सु्ब्रमण्यम स्वामी ने जीएसटी की अलोचना करते हुए कहा कि जीएसटी प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त होने वाली है। सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने टि्वटर अकांउट से टि्वट कर लिखा है कि GST प्रणाली ढहने के करीब है।
उन्होंने लिखा कि जमा राशि के रिफंड ना होने के कारण व्यापारी सड़को पर उतर सकते है। उन्होंने आगे लिखा है कि व्यापारियों द्वारा जमा राशि से ICICI और HDFC बैंक फल-फूल रहे है। सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार GST प्रणाली को ठीक से लागू नहीं कर पाई है। जिसके कारण व्यापारियों को मुश्किल होना स्वभाविक है।
आपको बता दे कि यह पहला मौका नहीं है जब सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी ही सरकार की नीतियों के खिलाफ मौर्चा खोला हो। वह इससे पहले भी कई बार सार्वजनिक मंचो से अपनी सराकर की नीतियों के खिलाफ खुलकर अपने विचार व्यक्त कर चुके है। यहीं नहीं सुब्रमण्यम स्वामी इसी साल GST को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दे चुके है।
इस बार उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए GST की जटिलता और उसके ठीक लागू कर पाने में सरकार की विफलता की आलोचना की है। इससे पहले भी सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि GST के जरिए जमा किए जाने वाला कर को ICICI और HDFC जैसे नीजि बैंको के जरिए विदेशी बैंको को लाभ पहुंचाने में किया जा रहा है।
आपको बता दे कि इसी महीने यानि 14 मार्च को वर्ल्ड बैंक ने भारत में GST को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार की अति महत्तवकांशी कर सुधार प्रणाली यानी गॅुडस एण्ड सर्विस टैक्स (GST) पर सवाल या निशान खड़े कर दिए है।
दरअसल वर्ल्ड बैंक ने जीएसटी को भारत में लागू करने को लेकर कहा है कि यह एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है। विश्व बैंक के अनुसार दुनिया के 115 देशों में से भारत में टैक्स रेट दूसरा सबसे ऊंचा है। आपको बता दे कि दुनिया में GST के अन्तर्गत पांच स्लैब बनाने वाले भारत समेत पांच देश हैं जिनमे इटली, लक्जेम्बर्ग, पाकिस्तान और घाना जैसे देश मौजूद है। बता दें कि चारो देशो कि अर्थव्यवस्था डांवाडोल है।
ओर वहीं दूसरी तरफ दुनिया के 49 देशों में GST के तहत एक और 28 देशों में दो स्लैब है। गौरतलब है कि मोदी सरकार के द्वारा 1 जुलाई 2017 को अमल में लाए गए GST के ढांचे में पांच स्लैब बनाए गए है। सभी वस्तुओं और सेवाओं को इसी दायरे में रखा गया है।
लेकिन सरकार ने कुछ वस्तुओं और सेवाओं जैसे अल्कोहल, पेट्रोलियम उत्पाद, रियल एस्टेट पर स्टाम्प ड्यूटी और बिजली बिल को GST के दायरे से बाहर रखा है। भारत इनमें सबसे ज्यादा स्लैब वाला देश है।
पिछले साल नंवबर में हुई GST कांउसिल की बैठक में 28 फीसदी के स्लैब को लेकर महत्तवपूर्ण फैसला लिया गया था। पहले GST के दायरे में 228 वस्तुओं व सेवाओं को रखा गया था, जिसे बाद में चौतरफा विरोद्ध के बाद घटाकर 50 कर दिया गया।
वर्ल्ड बैंक ने टैक्स रिफंड की धीमी गति को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है। इसके इलावा रिपोर्ट में GST कर प्रणाली के प्रावधानों को अमल में लाने पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए है। वर्ल्ड बैंक ने अपने अनुभवों के आधार पर भविष्य में स्थिति में सुधार आने की उम्मीद जताई है। रिपोर्ट में टैक्स रेट की संख्या कम करने और कानूनी प्रावधान व प्रक्रियाओं को सरल बनाने की सिफारिश की गई है।

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