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इस शख्स ने सौंपी थी नेताजी को आजाद हिंद फौज की कमान

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर पीएम मोदी मे उन्हें सैल्यूट किया।

इस शख्स ने सौंपी थी नेताजी को आजाद हिंद फौज की कमान
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नई दिल्ली. भारत के क्रांतिकारी नेता सुभाष चंद्र बोस का नाम आज भी इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज है। आज 23 जनवरी को उनकी 120वीं जयंती पूरा देश मना रहा है। 120वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा, "नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें सैल्यूट।
उनकी वीरता ने भारत को उपनिवेशवाद से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई।" उन्होंने आगे कहा, नेताजी एक महान बुद्धिजीवी थे जिन्होंने हमेशा समाज के उपेक्षित वर्गों के भलाई के बारे में सोचा।
आज नेताजी बोस की जयंती पर आपको बताएंगे उस शख्स के बारे में जिसने नेताजी बोस के हाथों में आजादी की लड़ाई के लिए आजाद हिंद फौज की कमान सौंपी थी।
आजाद द हिन्द फौज सबसे पहले राजा महेन्द्र प्रताप सिंह ने 29 अक्टूबर 1915 को अफगानिस्तान में बनायी थी। मूलत: यह 'आजाद हिन्द सरकार' की सेना थी जो अंग्रेजों से लड़कर भारत को मुक्त कराने के लक्ष्य से ही बनायी गयी थी।
लेकिन जिसे 'आजाद हिन्द फौज' कहा गया है उससे इस सेना का कोई सम्बन्ध नहीं है। हां, नाम और उद्देश्य दोनों के ही समान थे। रासबिहारी बोस ने जापानियों के प्रभाव और सहायता से दक्षिण-पूर्वी एशिया से जापान द्वारा एकत्रित क़रीब 40,000 भारतीय स्त्री-पुरुषों की प्रशिक्षित सेना का गठन शुरू किया था और उसे भी यही नाम दिया अर्थात् आज़ाद हिन्द फ़ौज। बाद में उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आज़ाद हिन्द फौज़ का सर्वोच्च कमाण्डर नियुक्त करके उनके हाथों में इसकी कमान सौंप दी।
आप भारत के मशहूर क्रांतिकारियों के बारे में पढ़ते होंगे कि किसी ने उस कमांडर को गोली मारी, किसी ने उस जनरल की हत्या की, किसी ने ट्रेन डकैती डाली, किसी ने वहां बम फोड़ा। रास बिहारी बोस ने अपने समय का सबसे दुस्साहस भरा काम किया, अगर बाकी क्रांतिकारियों की घटनाओं से तुलना करेंगे तो पाएंगे ये शायद सबसे हिम्मत का काम था।
गर्वनर जनरल की हैसियत उस वक्त वही होती थी जो आज प्रधानमंत्री की है, यानी देश का सर्वेसर्वा। रास बिहारी बोस ने उस वक्त के गर्वनर जनरल की हत्या करने की ही योजना बना ली थी, उस लॉर्ड हार्डिंग की जो देश की राजधानी कोलकाता से दिल्ली लाया था। उस वक्त रास बिहारी बोस देहरादून की फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम कर रहे थे, केमिकल्स के साथ उनका लगाव इस कदर था कि उन्होंने क्रूड बम बनाना सीख लिया था।
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