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सुभाष चंद्र बोस के बारे में कितना जानते हैं आप

सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) देश के ऐसे महानायकों में से एक हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। उनका संघर्ष ऐसा रहा है कि देश उन्हें कभी नहीं भुला पाया है। उनके संघर्षों को देखते हुए ही महात्मा गांधी ने उन्हें देशभक्त कहा था। अपनी मेहनत के चलते ही वह कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने। जानिए सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी हुई 10 खास बातें।

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सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) देश के ऐसे महानायकों में से एक हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। उनका संघर्ष ऐसा रहा है कि देश उन्हें कभी नहीं भुला पाया है। उनके संघर्षों को देखते हुए ही महात्मा गांधी ने उन्हें देशभक्त कहा था। अपनी मेहनत के चलते ही वह कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने। जानिए सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी हुई 10 खास बातें।


  • नेताजी के नाम से जाने जाने वाले सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक के मशहूर वकील थे।
  • कटक से अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद वह रेवेनशा कॉलिजिएट स्कूल में गए। जिसके बाद उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। 1919 में बीए की परीक्षा उन्होंने प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। यूनिवर्सिटी में उन्हें दूसरा स्थान मिला।
  • सुभाष के पिता की इच्छा थी कि वह ICS बने। ICS की तुलना आज के IAS से की जाती है। सुभाष ने अपने पिता की इच्छा पूरी की। 1920 में उन्होंने ICS की परीक्षा में चौथा स्थान हासिल किया। लेकिन वह अंग्रेजों के आधीन काम नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने 22 अप्रैल 1921 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

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  • गांधी से सुभाष चंद्र बोस की पहली मुलाकात 20 जुलाई 1921 को हुई। गांधी जी की ही सलाह पर वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए काम करने लगे।
  • जब वे कलकत्ता महापालिका के मेयर बने तब उन्होंने कलकत्ता के अंग्रेजी रास्तों का नाम बदलकर भारतीय नाम कर दिया।
  • भारत की आजादी के साथ-साथ वह सामाजिक काम भी करते रहते थे। बंगाल की भयंकर बाढ़ में घिरे लोगों को उन्होंने भोजन वस्त्र और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम किया। समाज सेवा के लिए ही उन्होंने युवक दल की स्थापना की।
  • भगत सिंह को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद वह लगातार रिहाई की मांग करते रहे। उन्होंने गांधी जी से भी रिहाई के लिए कहा। जब भगत सिंह को फांसी दे दी गई तो वह कांग्रेस और गांधी जी के काम करने के तरीके से खासा नाराज हुए।

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  • नेता जी को अपने जीवन में कुल 11 बार कारावास की सजा हो चुकी है। सबसे पहले 16 जुलाई 1921 को छह महीने के लिए उन्हें जेल जाना पड़ा। 1941 में एक मामले के लिए कलकत्ता की अदालत ने उन्हें कोर्ट में हाजिर होने को कहा। वह तभी घर छोड़कर जर्मनी चले गए। जहां उन्होंने हिटलर से मिलकर भारतीय युद्धबंदियों को छुड़ाया। उन्हीं के साथ मिलकर उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया। उन्होंने युवाओं को नारा दिया कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।

  • 1934 में अपने इलाज की खातिर वह ऑस्ट्रिया गए। उस समय उन्होंने अपनी पुस्तक को टाइप कराने के लिए एक टाइपिस्ट रखा। जिसका नाम एमिली शेंकल था। 1942 में उन्होंने एमिली से शादी कर ली।
  • 18 अगस्त 1945 को वो हवाई जहाज से मंचूरिया जा रहे थे। आधिकारी तौर पर इसी सफर के दौरान ताइहोकू हवाई अड्डे पर उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिसमें उनकी मौत हो गई। लेकिन कई लोगों का मानना था कि उनकी मौत नहीं हुई है, विमान दुर्घटना फर्जी थी। समय-समय पर तरह-तरह की अटकलें लगती रही हैं।

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