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सेटेलाइट कैंपस से नहीं पढ़ेंगे नए NIT संस्थानों के छात्र!

एनआईटी उत्तराखंड के अस्थायी कैंपस में छात्रों द्वारा प्रशासनिक सुविधाओं की कमी को लेकर जारी व्यापक विरोध-प्रदर्शन के थमने के बाद राहत की सांस ले रहे एचआरडी का कहना है कि इस तरह की समस्या अब किसी और नए एनआईटी संस्थान में देखने को नहीं मिलेगी।

सेटेलाइट कैंपस से नहीं पढ़ेंगे नए NIT संस्थानों के छात्र!

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड के अस्थायी कैंपस में छात्रों द्वारा प्रशासनिक सुविधाओं की कमी को लेकर जारी व्यापक विरोध-प्रदर्शन के थमने के बाद राहत की सांस ले रहे केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) का कहना है कि इस तरह की समस्या अब किसी और नए एनआईटी संस्थान में देखने को नहीं मिलेगी। क्योंकि बाकी राज्य सरकारों की ओर से प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के इन बेहतरीन संस्थानों को बनाने के लिए जो जमीन आवंटित की गई है। उसकी भौगोलिक संरचना से लेकर वहां किसी प्रकार का कोई और गतिरोध नहीं चल रहा है।

यहां बता दें कि देश में कुल 31 एनआईटी संस्थान हैं, जिनमें एनआईटी दिल्ली, कुरुक्षेत्र, रायपुर, भोपाल भी शामिल है। 31 में से 11 नए एनआईटी संस्थान हैं। दस के गठन का निर्णय केंद्र सरकार ने 2010 में लिया था और एक आंध्र-प्रदेश एनआईटी को खोलने का फैसला 2015 में लिया गया है। सेटेलाइट कैंपस स्थायी व अस्थायी कैंपस दोनों में से किसी की श्रेणी में नहीं आता है। इसकी व्यवस्था आपात परिस्थिति में छात्रों को पढ़ाने के लिए मूल प्रदेश से बाहर की जाती है।
यूं थमा उत्तराखंड विवाद
एनआईटी उत्तराखंड के श्रीनगर स्थित अस्थायी कैंपस में बीते कुछ समय से छात्रावास न होने और एक कमरे में तीन-चार बच्चों को एक साथ रखे जाने को लेकर छात्रों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी थी। इसी वजह से कक्षाएं भी नियमित रुप से नहीं हो रही थीं।
इसके अलावा प्रदेश सरकार की ओर से एनआईटी के स्थायी कैंपस के लिए जो जमीन दी गई थी। उसे एचआरडी मंत्रालय ने निर्माण के लिए अयोग्य ठहराते हुए अस्वीकृत कर दिया था।
इस बीच उग्र होते छात्रों के विरोध को देखते हुए मंत्रालय ने जयपुर एनआईटी में उत्तराखंड के लिए एक सेटेलाइट कैंपस बनाया और बीटेक के पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष में पढ़ने वाले कुल करीब 650 छात्रों को जयपुर एनआईटी भेजने का निर्णय लिया।
बीते 15 दिसंबर तक छात्र जयपुर पहुंच गए थे और 17 दिसंबर से इनकी कक्षाएं शुरु हो चुकी हैं। आगामी तीन वर्षों तक यह बच्चे जयपुर एनआईटी में ही पढ़ेंगे। लेकिन इन्हें बीटेक की डिग्री एनआईटी उत्तराखंड से ही मिलेगी।
बच्चों को पढ़ाने के लिए एनआईटी उत्तराखंड से कुछ प्रोफेसर भी जयपुर भेजे गए हैं। अभी एनआईटी उत्तराखंड में केवल बीटेक अंतिम वर्ष और एमटेक के पहले और दूसरे वर्ष में पढ़ने वाले कुल 350 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।

इन राज्यों में बनने हैं नए एनआईटी
जिन राज्यों में नए एनआईटी बन रहे हैं। उनमें देश की राजधानी दिल्ली भी शामिल है। इसके अलावा उत्तराखंड को छोड़कर गोवा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, पुडुचेरी, अरुणाचल-प्रदेश, आंध्र-प्रदेश जैसे राज्यों में नए एनआईटी संस्थानों के स्थायी कैंपस का निर्माण कार्य चल रहा है।
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