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अलविदा 2018 : GDP में फ्रांस को पछाड़कर भी भारत के सामने रही ये आर्थिक और वित्तीय चुनौतियां

वर्ष 2018 आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों का वर्ष रहा। विभिन्न आर्थिक मुश्किलों के बाद भी 2018 में भारत 7.5 फीसदी विकास दर के साथ दुनिया में पहले क्रम पर रहा। साथ ही विश्व बैंक की रिपोर्ट 2018 के अनुसार भारत सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर फ्रांस को पछाड़कर छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।

अलविदा 2018 :  GDP में फ्रांस को पछाड़कर भी भारत के सामने रही ये आर्थिक और वित्तीय चुनौतियां

निसंदेह वर्ष 2018 आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों का वर्ष रहा। यद्यपि वर्ष 2017 से नोटबंदी व जीएसटी के कारण उद्योग, कारोबार की कठिनाई, कम निवेश, कम रोजगार और कम विकास दर जैसी जो कई आर्थिक मुश्किलें विरासत में मिली थी, उनसे वर्ष 2018 पूरी तरह उबर नहीं पाया। विभिन्न आर्थिक मुश्किलों के बाद भी 2018 में भारत 7.5 फीसदी विकास दर के साथ दुनिया में पहले क्रम पर रहा। साथ ही विश्व बैंक की रिपोर्ट 2018 के अनुसार भारत सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर फ्रांस को पछाड़कर छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।

वर्षभर देश के आर्थिक परिदृश्य पर तेजी से बढ़ती हुई चार अहम आर्थिक-सामाजिक चुनौतियां संपूर्ण अर्थव्यवस्था को चिंतित करते हुए दिखाई दी। एक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, दो, अमेरिकी डॉलर का मूल्य 70 रुपये पर पहुंच गया। तीन, देश का राजकोषीय घाटा तेजी से बढ़ा है और चार, आयात बढ़ने और निर्यात नहीं बढ़ने से विदेशी मुद्रा कोष में कमी आई।

यकीनन उद्योग-कारोबार और प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में वर्ष 2018 में भारत की कई उपलब्धियां रेखांकित हुई। विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2018 के अनुसार भारत को 190 देशों की सूची में 77वां स्थान दिया गया। विश्व प्रतिस्पर्धा केन्द्र रिपोर्ट 2018 के अनुसार 63 देशों की वैश्विक प्रतिस्पर्धी रैंकिंग में भारत 44वें स्थान पर रहा।

वैश्विक परामर्श फर्म एटी कियर्नेे के अनुसार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश विश्वास सूचकांक-2018 में 25 देशों की अर्थव्यवस्थाओं में भारत को 11वां स्थान प्राप्त हुआ। इसी तरह अन्तरराष्ट्रीय सलाहकारी कम्पनी पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट के अनुसार भारत को दुनियाभर में निवेश हेतु पांचवां सबसे आकर्षक बाजार बताया गया। वर्ष 2018 में देश का बैंकिंग क्षेत्र लगातार चर्चित रहा।

14 फरवरी, 2018 को पंजाब नेशनल बैंक में देश की सबसे बड़ी धोखाधड़ी पकड़ी गई। यह फ्रॉड 13417 करोड़ रुपये से अधिक का था। पंजाब नेशनल बैंक ने डायमंड कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ केस दर्ज किया। फिर विजय माल्या के खिलाफ भी धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक को जनवरी से मार्च 2018 के दौरान 7718 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

उल्लेखनीय है कि देश में बैंकिंग घोटालों को रोकने के लिए सरकार ने तीन महत्वपूर्ण आर्थिक कानून लागू किए। जिनसे बैंकिंग सुधार का परिदृश्य दिखाई देने लगा है। वर्ष 2018 में केन्द्र और रिजर्व बैंक के रिश्तों में कड़वाहाट रही, रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दिया और सरकार ने शक्तिकांत दास को नया गवर्नर बनाया।

वर्ष 2018 से सरकार ने कृषि, उद्योग, कारोबार क्षेत्र को कई राहत भी प्रदान की। चूंकि देश के सूक्ष्म, लघु और मझौले क्षेत्र की अधिकांश इकाइयों ने नोटबंदी और जीएसटी के लगातार दो झटकों को झेला था। इस क्षेत्र के कारोबारियों को राहत देने के लिए 2 नवंबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूक्ष्म, लघु और मझौली इकाइयों को राहत देने के लिए 12 महत्वपूर्ण प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणा की।

इसी तरह जीएसटी काउंसिल ने 22 दिसंबर को आम आदमी के उपयोग की 17 वस्तुओं और छह सेवाओं पर जीएसटी की दरें घटाने का फैसला किया। काउंसिल ने कुल 7 वस्तुओं को 28 प्रतिशत स्लैब के दायरे से बाहर किया है। नई दरें एक जनवरी से प्रभावी होंगी। निसंदेह वर्ष 2018 कई प्रमुख आर्थिक निर्णयों के लिए भी याद किया जाएगा।

देश के विकास में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के महत्व को देखते हुए इसे बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए गए। सिंगल ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति ऑटोमैटिक रुट के जरिए प्रदान कर दी गई। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज की दर घटाकर 8.55 फीसदी कर दी।

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च, 2018 को समाप्त पिछले वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह 18 प्रतिशत बढ़कर 10.02 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके साथ ही आयकर रिटर्न की संख्या बढ़कर 6.84 करोड़ हो गई। अमेरिकी कम्पनी वालमार्ट ने देश की ई-कॉमर्स क्षेत्र की सबसे बड़ी कम्पनी फ्लिपकार्ट की 77 प्रतिशत हिस्सेदारी 16 अरब डॉलर में खरीदकर इसका अधिग्रहण किया।

वर्ष 2018 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज संयुक्त राज्य अमेरिका सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन द्वारा डिजाइंड ऑफशोर सिक्योरिटीज मार्केट के रूप में नामित होने वाला पहला भारतीय स्टॉक एक्सचेंज बन गया। इससे भारत में अमेरिकी निवेशकों के लिए व्यापार करना सरल हो गया। एक नवंबर 2018 से अमेरिका ने 90 वस्तुओं को ड्यूटी फ्री आयात की सूची से हटा दिया।

भारत इनमें से करीब 50 वस्तुओं का निर्यात अमेरिका को करता है। इनमें ज्यादातर हैंडलूम और कृषि क्षेत्र के उत्पाद हैं। इस फैसले से भारत का अमेरिका को निर्यात प्रभावित हुआ। यद्यपि दुनिया के अधिकांश शेयर बाजार डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते ट्रेड वॉर के दुष्परिणामों से तेजी से ढ़हते हुए दिखाई दिए, लेकिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट बहुत कम रही।

वर्ष 2018 में वैश्विक स्तर पर भी भारत की आर्थिक साख आगे बढ़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 मई से दो जून तक इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर का दौरा किया। यह दौरा एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन्स के 10 देशों इंडोनेशिया, फिलीपीन्स, सिंगापुर, मलेशिया, बु्रनेई, थाइलैंड, म्यांमार, लाओस, वियतनाम और कंबोडिया के साथ संबंधों को बढ़ाने के लिए भारत के प्रयासों का हिस्सा था।

वर्ष 2018 में आसियान में भारत की आर्थिक भागीदारी आगे बढ़ी। इसी तरह 25 से 27 जुलाई को दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में आयोजित हुए दसवें ब्रिक्स में आर्थिक साझेदारी आगे बढ़ी। लेकिन वर्ष 2018 के अंतिम दिसम्बर महीने में देश के समक्ष तीन उभरी हुई चुनौतियां वर्ष 2019 को आर्थिक विरासत के रूप में मिलते हुए दिखाई दे रही हैं।

इनमें से एक कच्चे तेल, दूसरी राजकोषीय घाटा तथा तीसरी किसानों की कर्जमाफी से संबंधित है। यद्यपि कच्चे तेल की कीमतें 45 डॉलर प्रति बैरल है तथा डॉलर की तुलना में रुपया 70 के स्तर पर है। इसी तरह चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के पिछले महीनों में जो राजकोषीय घाटा ऊंचाई पर पहुंच गया है उसे पाटा जाना मुश्किल दिखाई दिया।

जीएसटी संग्रह लक्ष्य से करीब एक लाख करोड़ रुपये कम है । विनिवेश लक्ष्य प्राप्ति से दूर है। तेल सब्सिडी व अनाज सब्सिडी का अतिरिक्त बोझ स्पष्ट दिखाई दे रहा है। परिणामस्वरूप राजकोषीय घाटा निर्धारित लक्ष्य से कुछ अधिक जीडीपी के 3.5 प्रतिशत पर पहुंच सकता है। देश की अर्थव्यवस्था के समक्ष एक बड़ी नई चुनौती किसानों की कर्ज माफी से संबंधित है।

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किसानों की कर्ज माफी के वचन से कांग्रेस के चुनाव जीतने के बाद अन्य प्रदेशों की सरकारों पर भी कर्ज को माफ करने का दबाव पड़ा है। इस पर चार लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम व्यय होगा। यदि कर्ज माफी का ऐसा कुठाराघाती कदम उठाया गया तो वर्ष 2019 में अर्थव्यवस्था की मुश्किलें बढ़ेगी, महंगाई बढ़ेगी, विकास दर घटेगी और भारत की वैश्विक वित्तीय व निवेश रैंकिंग भी घटेगी।

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