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Republic Day 2018: 69वें गणतंत्र दिवस पर जानिए 26 जनवरी के संविधान में शामिल होने की कहानी

26 जनवरी 1950 को संविधान के पूरी तरह से लागू होने के बाद से 26 जनवरी को ''गणतंत्र दिवस'' के रूप में मनाया जाने लगा।

Republic Day 2018: 69वें गणतंत्र दिवस पर जानिए 26 जनवरी के संविधान में शामिल होने की कहानी

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। उस समय जॉर्ज षष्ठम को राष्ट्र प्रमुख व अरल माउमटबेटन को गवर्नर जनरल बनाया गया। भारत देश आजाद तो हो गया लेकिन इसके पास अपना कोई संविधान नहीं था। भारतीय कानून गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 पर आधारित था।

आंबेडकर की अध्यक्षता में बनी समिति

भारतीय संविधान का प्रारूप बनाने के लिए 29 अगस्त 1947 को डॉ. बी.आर आंबेडकर की अध्यक्षता में एक प्रारूप समिति गठित की गई थी। जिसके बाद इस प्रारूप समिति ने संविधान को तैयार करके 4 नवंबर 1947 को 'संविधान सभा' को सौंपा।

संविधान को तैयार करने में इस समिति को 2 साल ग्यारह महीने और 18 दिन का समय लगा। जिसके बाद इसे अंतिम रूप से 26 जनवरी 1950 को संविधान प्रभावी हुआ। ये दिन 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि इसी दिन 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।

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दो सीमा आयोगों का हुआ गठन

वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने जून 1947 को पंजाब और बंगाल के विभाजन के लिए 2 सीमा आयोगों का गठन किया और इसका चेयरमैन ब्रिटिश बैरिस्टर सेरिल रेडक्लिफ को बनाया।

जिसके बाद रेडक्लिफ ने 13 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान को विभाजित करने वाला नक्शा पेश किया था। वह पहली और अंतिम बार उस काम के लिए भारत आए। वो पहली और आखिरी बार उस काम के लिए भारत आए थे।

लॉर्ड माउंटबेटन पर था ये दबाव

  • भारत और पाकिस्तान के आजाद होने पर लॉर्ड माउंटबेटन पर दोनों जगह 'स्वतंत्रता समारोह' में शिरकत करने का दबाव था। इसलिए उसने दोनों जगह उपस्थित रहने के लिए पाकिस्तान की स्वतंत्रता की तारीख 14 अगस्त निर्धारित कर दी थी। यही वजह है कि पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस एक दिन पहले यानि 14 अगस्त को मनाया जाता है।

  • सन् 1976 में इमरजेंसी के दौरान संविधान में संशोधन किया गया और इसकी प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ शब्द जोड़ा गया।

  • इसके बाद साल 1946 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार सत्ता में आई। पीएम क्लीमेंट एटली की उस सरकार ने फरवरी 1947 में घोषणा की कि ज्यादतर ब्रिटिश जून 1948 से पहले ही भारत को छोड़कर यहां से चले जाएंगे।

  • अगस्त 1947 तक जम्मू कश्मीर के राजा ने यह निश्चय नहीं किया था कि वो किसके साथ रहना चाहते हैं?

  • साल 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग करते हुए 26 जनवरी को 'स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनया जाने लगा।

  • साल 1947 तक कांग्रेस ने हर साल 26 जनवरी को ही 'स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाया।

  • इसके बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान के पूरी तरह से लागू होने के बाद से 26 जनवरी को 'गणतंत्र दिवस' के रूप में मनाया जाने लगा।

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