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गांधी जयंती 2017: तीन गोलियों ने आजाद भारत से छीन लिया बापू को, मुंह से निकला ये अंतिम शब्द

महात्मा गांधी को तीन गोलियां लगी थीं।

गांधी जयंती 2017: तीन गोलियों ने आजाद भारत से छीन लिया बापू को, मुंह से निकला ये अंतिम शब्द
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हे राम! महात्मा गांधी ने अपने इन आखरी शब्दों के साथ देश से विदा ले लिया लेकिन देश के लिए उनकी कुर्बानियों को कभी नहीं भूली जा सकता हैं। 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी ने आखिरी सांसे लीं।

गांधी जी ने अपने जीवन के 12 हजार 75 दिन स्वतंत्रता संग्राम में लगाए लेकिन आजाद भारत या फिर कहें कि उनके सपनों के भारत में वो सिर्फ 168 दिन ही सांसे ले पाए। धांय, धांय, धांय नाथू राम गोडसे की तीन गोलियों ने महात्मा गांधी के शरीर को छलनी कर दिया।

पहली गोली- पहली गोली बापू के मघ्य रेखा से साढ़े तीन इंच दाई तरफ और नाभि से ढाई इंच ऊपर पेट में घुसी और पीठ से बाहर आ गई। गोली लगते ही आगे बढ़ने के लिए बापू के बढ़ाए गए कदम रुक गए और वो वहीं खड़े रह गए।
दूसरी गोली- उसी रेखा से एक इंच दाईं तरफ पसलियों के बीच होकर घुसी और पीठ से बाहर निकली। बापू का सफेद रंग का कपड़ा एकदम लाल हो गया। बापू का चेहरा सफेद पड़ गया और उन्होंने अपने दोनों हाथ जोड़ लिए। कुछ देर के लिए वो अपनी सहयोगी आभा के कंधे पर अटके रहे। फिर उनके मुंह से निकला हे राम!
तीसरी गोली- सीने में दाईं तरफ मध्य रेखा से चार इंच दाईं ओर लगी और फेफड़े में जा घुसी। इसके बाद आभा और मनु दोनों ने गांधी जी का सिर अपने हाथों पर टिकाया। बापू गिर गए और उनका चश्मा आंखों से गिर गई। पैरों से चप्पल भी उतर गई।
गांधी जी की आंखे आधी खुली थीं और लग रहा था कि उनके शरीर में जान बची है। उन्हें बिरला भवन स्थित उवनके खंड में ले जाया गया। सरदार पटेल की मुलाकात गांधी जी से कुछ ही देर पहले हुई थी। खबर सुनते ही वो वापस लौटे औऱ उन्होंने गांधी जी की नाड़ी देखी। उन्हें लगा कि वो मंद गति से चल रही है।
गोली लगने के दस मिनट बाद डॉ द्वारकाप्रसाद भार्गव पहुंचे। उन्होंने कहा कि बापू को छोड़े हुए दस मिनट हो गए हैं। इसके बाद तो आंसुओं का सैलाब आ गया। डॉ जीवराव मेहता ने बापू की मृत्यु

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