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प्रधानमंत्री लालकिले से ही क्यों फहराते हैं तिरंगा, ये है दिलचस्प कहानी

भारत के प्रधानमंत्री लालकिले से तिरंगा फहराते हैं। लेकिन इसके पीछे की कहानी जानकर आपको भी हैरानी होगी।

प्रधानमंत्री लालकिले से ही क्यों फहराते हैं तिरंगा, ये है दिलचस्प कहानी
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भारत के प्रधानमंत्री लालकिले से तिरंगा फहराते हैं। सबसे पहली बार भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने यहां झंडा फहराया था। आप यह सोच रहे होंगे आखिर प्रधानमंत्री ही लालकिले से ही क्यों फहराते हैं तिरंगा?
लालकिले से भारतीय तिरंगा फहराने की कहानी काफी खास है। लालकिला इतिहास से लेकर अबतक राजनीतिक रुप से काफी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। अब इसकी देखरेख का जिम्मा भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के पास है।
लालकिले को बनाने में दस साल लगे थे इसके बनने की शुरुआत 1638 में हुई थी। लालकिले का नाम पहले 'किला-ए-मुबारक' था। भारत की सबसे खूबसरत इमारतों में यह एक अहम स्थान रखता है।
मुगलों को नदियों से काफी प्यार था। इस कारण उनकी अधिकतर इमारत नदी के किनारे मिलेंगी। ताजमहल जिस तरह यमुना के किनारे है उसी तरह लालकिला भी यमुना के किनारे बना है।
इस इमारत का निर्माण उस्ताद अहमद लाहौरी ने करवाया था। आपको जानकर हैरानी होगी की अहमद लाहौरी ने ही आगरा के ताजमहल का डिजाइन तैयार किया था।
1857 की क्रांति की शुरुआत मेरठ में हुई।
इसके बाद ये क्रांति की आग दिल्ली तक पहुंच गई। मुगल साम्राज्य के अंतिम बादशाह बहादुर शाह द्वितीय को भारत का शासक घोषित कर दिया। इस कारण गुस्साए अंग्रेजों ने बहादुर शाह द्वितीय को गिरफ्तार कर लिया।
इस दौरान चली लड़ाई में कई लोग जो आंदोलन कर रहे थे उनकी जानें चली गईं। बादशाह पर मुकदमा चला। दीवान-ए-खास में करीब 40 दिनों तक मुकदमा चलने के बाद उसे देश निकाला कर दिया गया। जनवरी 1857 में उसे रंगून भेज दिया गया।

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लालकिले में मुगलों ने करीब 200 सालों तक निवास किया। मुगल यहां से अपना राजपाठ चलाने थे। धीरे धीरे लालकिले में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होने लगे। इससे इसका महत्व समय के साथ बढ़ता ही चला गया।
इसके कई साल बाद हमें आजादी मिली। आजादी के समय दिल्ली की सबसे महत्वपूर्ण इमारतों में यह एक थी। आजादी के बाद सबसे पहले नेहरू ने यहां तिरंगा फहराया और इसके बाद यह भारतीय इतिहास में आजादी का प्रतीक बन गया। इस कारण आन बान शान हम लालकिले से तिरंगा फहराते हैं।

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