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राज्य सरकारें नहीं चाहती की जीएसटी के दायरे में आए पेट्रोल-डीजल: जेटली

राज्यों का फिलहाल जो मन है, वह यह है कि वे पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में नहीं लाना चाहते।

राज्य सरकारें नहीं चाहती की जीएसटी के दायरे में आए पेट्रोल-डीजल: जेटली
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आ रही लगातार बढ़ोतरी की वजह से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ती जा रही हैं, लेकिन पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से लोगों को जल्द राहत मिलती नहीं दिख रही है। बजट के बाद जीएसटी परिषद से राहत की उम्मीद कर रहे आम आदमी यहां भी खाली हाथ हो सकता है।

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को इस मामले को लेकर बताया कि राज्य पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों का फिलहाल जो मन है, वह यह है कि वे पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में नहीं लाना चाहते।

इस बजट में केंद्र सरकार ने पहले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 2 प्रतिशत कम करने का फैसला लिया और साथ ही सेस में 2 रुपये की बढ़ोतरी भी कर दी जिससे पेट्रोल, डीजल के दाम जस के तस हैं।

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ये आ सकते हैं दायरे में

हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि प्राकृतिक गैस, रियल इस्टेट पहले जीएसटी के दायरे में लाए जा सकते हैं। इनके बाद कहीं जाकर पेट्रोल और डीजल का नंबर लग सकता है। उन्होंने कहा कि इसके बाद हम पेट्रोल, डीजल, पीने योग्य अल्कोहल को भी इसके दायरे में लाने के लिए प्रयास करेंगे।

सहमति न बनने की ये है वजह

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब भी कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होता है, तो इससे राज्यों का राजस्व भी बढ़ता है। राज्यों के राजस्व की एक बड़ी रकम पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले वैट से आती है।

इसके साथ ही कम वैट लगाने वाले राज्य की सरकारें अपने राजनीतिक लाभ को देखते हुए पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर सहम‍त नहीं होंगे क्योंकि उनके सामने जीएसटी की वजह से कीमतें बढ़ने का खतरा होगा।

कई राज्यों में बढ़ जाएंगे दाम

जीएसटी परिषद के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि अगर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो इससे देश भर में अलग-अलग सेल्स टैक्स की बजाय एक ही टैक्स हो जाएगा।

कम वैट वसूलने वाले राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बहुत बड़े स्तर पर बढ़ोतरी हो जाएगी. ऐसे में कोई राजनीतिक पार्टी नहीं चाहेगी कि वह ऐसा कोई कदम उठाए।

एक ड्यूटी हटाई, सेस लगाया

बता दें कि आम आदमी को उम्मीद थी कि बजट में एक्साइज ड्यूटी घटाकर सरकार आम आदमी को राहत देगी, लेक‍िन ऐसा नहीं हुआ। सरकार ने पहले एक तरफ एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला लिया तो वहीं, दूसरी तरफ सेस बढ़ाकर तेल की कीमतों को बराबर कर दिया।

धर्मेन्द्र ने राज्यों पर फोड़ा ठीकरा

डीजल और पेट्रोल की कीमतों में लगातार वृद्धि पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण गिनाते हुए इसका ठीकरा राज्य सरकारों के सिर पर फोड़ा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अक्टूबर 2017 में ही केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती का फैसला किया था लेकिन सिर्फ चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने इस पर अमल करते हुए पेट्रोल डीजल पर सेल्स टेक्स और वैट कम किया।

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