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भारत में जल्द होगा भुखमरी और कुपोषण का खात्माः राधा मोहन सिंह

राधा मोहन सिंह ने कहा कि भारत को विश्व के केवल 2.4% भौगोलिक क्षेत्र के साथ विश्व की 17 प्रतिशत जनसंख्या का भरण पोषण करना पड़ता है।

भारत में जल्द होगा भुखमरी और कुपोषण का खात्माः राधा मोहन सिंह

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि हम अगली पीढ़ियों के हित को ध्यान में रखते हुए सतत कृषि विकास की आवश्यकता के प्रति सजग हैं साथ ही भुखमरी और कुपोषण को समाप्त करने के प्रति वचनबद्ध हैं। भारत कपास, चावल, माँस, खली और चीनी के भारी निर्यात के साथ विश्व में कृषि उत्पादों के 15 अग्रणी निर्यातकों में से एक है। बासमती चावल, ग्वार गम और एरंड जैसे विशेषीकृत कृषि उत्पादों में भी निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता आई है। उन्होंने सोमवार को इटली के रोम में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के सम्मेलन के 39वें सत्र को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए।

राधा मोहन सिंह ने कहा कि भारत को विश्व के केवल 2.4 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र के साथ विश्व की 17 प्रतिशत जनसंख्या का भरण पोषण करना पड़ता है। कृषि निरन्तर रूप से भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक बनी हुई है और वर्ष 2014-15 में इसने भारत की जीडीपी में 16 प्रतिशत का योगदान किया। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र ने भारत की अधिकांश (55 प्रतिशत) आबादी को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करवाए हैं। भारतीय कृषि ने आत्म-निर्भरता हासिल कर ली है और हम अपनी जनसंख्या का भरण-पोषण करते हुए कृषिगत उत्पादों के व्यापार में महती भूमिका का निर्वाह करते हुए गर्व महसूस करते हैं।
उन्होंने कहा कि अधिक मूल्य वाली फसलों तथा साथ ही फलों, सब्जियों और मांस की ओर भारत के उपभोक्ताओं के खपत प्रतिमान में परिवर्तन तथा इस परिवर्तन से उत्पन्न मूल्य संकेतों का उत्तर देते हुए भारतीय किसानों ने खाद्यान्न के बदले अधिक लाभप्रद और अधिक मूल्य वाली फसलों और बागवानी ने बढ़ना शुरू किया है। इसके कारण सामान्य रूप से कृषि निवेश की आवश्यकता एवं विशेष रूप से फसल पश्चात अवसंरचना, प्रसंस्करण सुविधाओं एवं वेयरहाउसिंग में वृद्धि हुई है। कृषि मंत्री ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्थिर उत्पादकता स्तर और वर्धित अजैविक और जैविक दबाव जो फसल पैदावार में बाधक हैं।
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