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Reservation In India : आरक्षण क्या है, आरक्षण की आवश्यकता, आरक्षण की वर्तमान स्थिति और क्यों हो रहा है आरक्षण का विरोध

भारत में आरक्षण (Reservation In India) को लेकर हमेश ही राजनीति होती रही है, आरक्षण की खबरें (Reservation News) भी गूगल पर खूब ट्रेंड करती हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव 2019 से कुछ महीने पहले ही सामान्य वर्ग के गरीबों को सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण (Reservation For General Category) दे दिया और आरक्षण विधेयक (Reservation Bill) को लोकसभा में भी पास करवा लिया। आज राज्यसभा में इसपर चर्चा हो रही है। ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि आरक्षण क्या है (What Is The Reservation), आरक्षण की आवश्यकता (Need For Reservation), आरक्षण की वर्तमान स्थिति (Current Status Of Reservation) और क्यों आरक्षण का विरोध (Resistance Reservation) हो रहा है।

Reservation In India : आरक्षण क्या है, आरक्षण की आवश्यकता, आरक्षण की वर्तमान स्थिति और क्यों हो रहा है आरक्षण का विरोध

भारत में आरक्षण (Reservation In India) को लेकर हमेश ही राजनीति होती रही है, आरक्षण की खबरें (Reservation News) भी गूगल पर खूब ट्रेंड करती हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव 2019 से कुछ महीने पहले ही सामान्य वर्ग के गरीबों को सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण (Reservation For General Category) दे दिया और आरक्षण विधेयक (Reservation Bill) को लोकसभा में भी पास करवा लिया। आज राज्यसभा में इसपर चर्चा हो रही है। ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि आरक्षण क्या है (What Is The Reservation), आरक्षण की आवश्यकता (Need For Reservation), आरक्षण की वर्तमान स्थिति (Current Status Of Reservation) और क्यों आरक्षण का विरोध (Resistance Reservation) हो रहा है।

आरक्षण क्या है (What Is The Reservation)

इन दिनों भारत में आरक्षण को लेकर राजनीति जंग छिड़ी हुई है ऐसे में आपको बता दें कि आरक्षण क्या होता है, आरक्षण का इतिहास क्या है, सन 1902 में महाराष्ट्र में कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति साहूजी महाराज ने भारत में गरीबों के हित के लिए आरक्षण को लागू किया खास तौर पर पिछड़े वर्गों के लिए नौकरियों में आरक्षण देने की व्यवस्था की गई थी।

आरक्षण की आवश्यकता (Need For Reservation)

गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का फैसला मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक माना जा सकता है। लंबे समय से गरीब सवर्णों को कोटे की मांग पर केंद्रीय कैबिनेट का मुहर लगाना साहसिक कदम है। अब अगर ये सवाल उठे कि आरक्षण की आवश्यकता क्यों है तो आपको बता दें कि क्योंकि आरक्षण देने या हटाने का कोई भी फैसला करना सियासी रूप से आसान नहीं होता है। इसमें एक को आरक्षण देने से दूसरे वर्ग के पॉलिटिकली नाराज होने की संभावना बनी रहती है।

आरक्षण की वर्तमान स्थिति (Current Status Of Reservation)

वर्ग आरक्षण

ओबीसी 27%

एससी 15%

एसटी 7.5%

सामान्य 10%

कुल 59.5%

आरक्षण की वर्तमान स्थिति (Current Status Of Reservation)

आरक्षण की वर्तमान स्थिति की बात करें तो अनुसूचित जाति/ जनजाति एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिस तरह का वितंडा खड़ा हुआ और उसके बाद केंद्र सरकार के करेक्टिव एक्शन के बाद जिस तरह की राजनीतिक परिस्थितियां उत्पन्न हुईं, उसमें दोनों ही स्थिति मोदी सरकार के लिए इधर कुआं, उधर खाई जैसी हो गई। 2018 में 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही हो सकती है। इस एक्ट के तहत दर्ज केस में आरोपित की तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के लिए अनुसूचित समाज ने मोदी सरकार पर ठीकरा फोड़ा, जबकि फैसला सर्वोच्च अदालत का था। अनुसूचित समुदाय की इस नाराजगी को देखते हुए मोदी सरकार ने एससी/एसटी एक्ट को पुराने और मूल स्वरूप में लाने के लिए संशोधन विधेयक पास करा कर शीर्ष अदालत के निर्णय को निष्प्रभावी कर दिया। लेकिन सरकार के इस कदम से सवर्ण नाराज हो गया।

आरक्षण का विरोध (Resistance Reservation)

ऐसी मान्यता है कि एससी/एसटी एक्ट के तहत सबसे अधिक उत्पीड़न सवर्ण का ही होता है। इसका असर पिछले विधानसभा चुनावों में दिखा। अब माना जा रहा है कि सवर्णों की नाराजगी खत्म करने के लिए मोदी सरकार शैक्षणिक व सरकारी नौकरियों में गरीब सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। हालांकि इस कोटे को लागू करना आसान नहीं होगा। 1963 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक 50 फीसदी से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता। विशेष प्रावधान के तहत कुछ राज्यों में 50 फीसदी से अधिक आरक्षण जरूर है, पर वह आर्थिक आधार पर नहीं है। केंद्र में ऐसा करने के लिए सरकार को संविधान संशोधन करना होगा, जिसके लिए सत्ता पक्ष के पास निम्न व उच्च सदन में दो तिहाई बहुमत होना चाहिए।

आरक्षण पर राज्यसभा में पेंच (Reservation In RajyaSabha)

मोदी सरकार के पास राज्यसभा में सामान्य बहुमत तक नहीं है। ऐसे में संविधान संशोधन दूर की कौड़ी है। मौजूदा सरकार के पास समय भी नहीं है, सत्र केवल एक दिन बचा है, उसमें बिल पेश हो जाय वही बड़ी बात है। एक और अहम बात यह भी है कि संविधान में किसी को भी आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का प्रावधान ही नहीं है। संविधान सामाजिक असमानता के आधार पर आरक्षण देने की बात करता है। इस हिसाब से भी सवर्णों को आरक्षण देने का रास्ता कठिन है। सरकार के इस निर्णय को अदालत में ठहरना भी मुश्किल है, कारण इससे पहले गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, बिहार व 1992 में पीवी नरसिम्हा राव की केंद्रीय सरकार ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की घोषणाएं कीं, लेकिन सभी फैसले अदालतों में खारिज हो गए। इस फैसले का संवैधानिक व अदालती हश्र जो भी हो, यह तो वक्त पर निर्भर करेगा कि सरकार इसे लागू करने के लिए कितना सार्थक प्रयास करती है, पर यह आगामी लोकसभा चुनाव के लिए राजग का बड़ा राजनीतिक दांव साबित हो सकता है। सरकार इस निर्णय की टाइमिंग ऐसी है, जिसके राजनीतिक उद्येश्य साफ दिखते हैं।

आरक्षण के लाभ (Reservation Benefits)

यहां पर यह उल्लेख करना जरूरी है कि सरकार को सभी आरक्षण के अब तक के परिणाम का सामाजिक मूल्यांकन जरूर करना चाहिए। कोटा दर कोटा को विस्तार देने से अच्छा है कि इसे तथ्यात्मक संदर्भ में सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। आरक्षण को राजनीति का हथियार बनने से रोका जाना चाहिए। सभी प्रकार के आरक्षण के सभी पहलुओं पर देश में गंभीर विमर्श होना चाहिए।

इन्हें मिलेंगे आरक्षण के लाभ (Reservation For General Category Criteria)

- सालाना आय 8 लाख से कम हो

- 5 हेक्टेयर से कम की खेती की जमीन हो

-1000 स्क्वायर फीट से कम का घर हो

- निगम की 109 गज से कम अधिसूचित जमीन हो

- 209 गज से कम की निगम की गैर-अधिसूचित जमीन हो

- जो किसी भी तरह के आरक्षण के अंतर्गत नहीं आते थे

इन्हें नहीं होगा फायदा

जिस व्यक्ति के पास तय सीमा से अधिक संपत्ति होगी, उसे इस संशोधन का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा जिनके पास सरकारी जमीन (डीडीए, निगम की जमीन) पर अपना मकान होगा, उन्हें भी इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। 

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