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बेनकाब हुई सपा सरकार, भोपाल एनकाउंटर का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को मिली एनकाउंटर की धमकी

सपा सरकार का साम्प्रदायिक और मुस्लिम विरोधी चरित्र हुआ उजागर

बेनकाब हुई सपा सरकार, भोपाल एनकाउंटर का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को मिली एनकाउंटर की धमकी
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नई दिल्ली. भोपाल एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग को लेकर विरोध कर रहे रिहाई मंच के कार्यकर्ताओं को दमनकारी समाजवादी सरकार की पुलिस ने एनकाउंटर की धमकी दी है। दरअसल लखनऊ में बुधवार को भोपाल एनकाउंटर को लेकर रिहाई मंच ने धरना आयोजित किया था। लेकिन पुलिस ने धरना-प्रदर्शन करने से पहले ही कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला बोल दिया।
मंच प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि धरना शुरू होने से पहले ही मंच महासचिव राजीव यादव और शकील कुरैशी को धरना स्थल से लाठी से पीटते हुए पुलिस चौकी के अंदर ले गई और घंटों तक सीमी आतंकी, मुसलमान और पाकिस्तानी एजेंट बताकर पीटती रही। यह बर्बर कार्रवाई अखिलेश सरकार के साम्प्रदायिक और मुस्लिम विरोधी चरित्र को उजागर करता है।
आलम ने बताया कि पिटाई के दौरान पुलिस कर्मियों ने अपने नेम प्लेट हटा लिए थे जो साबित करता है कि पुलिस ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत फर्जी एनकाउंटर पर सवाल उठाने वालों को पीटा जिसमें शकील कुरैशी का हाथ टूट गया और राजीव यादव को गंभीर चोटें आईं।
उन्होंने कहा कि मंच के नेताओं को अवैध कानूनी हिरासत में पीटने के बाद फर्जी एनकाउंटर में मारने की धमकी दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मंच महासचिव राजीव यादव के बेहोश हो जाने के घंटों बाद तक भी अस्पताल न ले जाना साबित करता है कि पुलिस इन नेताओं की हत्या करना चाहती थी।
मंच प्रवक्ता अनिल यादव ने कहा कि कार्यकर्ताओं को दी गई एनकाउंटर की धमकी से यह साफ हो जाता है कि अखिलेश और शिवराज की पुलिस में कोई अंतर नहीं है। इस हमले ने सपा सरकार के मुस्लिम विरोधी चरित्र को बेनकाब किया है। मंच अभियान चलाकर जनता के बीच सपा सरकार के मुस्लिम विरोधी चरित्र को बेनकाब करेगा। मंच ने हमलावर पुलिस कर्मियों को तत्काल निलम्बित करने की मांग की है साथ ही पुलिसिया बर्बरता का वीडियो भी जारी किया है।

पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स ने इस पुलिसिया बर्बरता की कड़ी निंदा की है। संगठन का कहना है कि आज इस देश में गुंडा राज देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ बर्बर तरीके से 8 विचाराधीन कैदियों को, जो कि प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े मामलों में अभियुक्त थे, फर्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया जाता है। वहीँ दूसरी तरफ इसके खिलाफ उठती आवाज़ों को खुलेआम दबाया जा रहा है।
संगठन के मुताबिक, फर्ज़ी एनकाउंटर में मारे गए कैदियों को तो नेताओं ने आतंकवादी घोषित कर ही दिया है। साथ ही सरकार के खिलाफ धरना देने वालों को भी आतंकवादी बताया जा रहा है और उन पर जानलेवा हमला किया जा रहा है।
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