Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

जानिए किस देश के सैनिकों को मिलता है कैसा ''खाना''

सेना को मिलता है इस स्तर का आटा।

जानिए किस देश के सैनिकों को मिलता है कैसा खाना
X
नई दिल्ली. अक्सर आपने सुना होगा पाकिस्तानी सेना को घटिया भोजन परोसा जाता है, लेकिन इस बार भारतीय सेना के एक जवान ने आरोप लगाया है कि सैनिकों को बर्बरता का सामना करना पड़ता है और उन्हें घटिया किसम का भोजन परोसा जाता है और कई बार तो भूखे भी रहना पड़ता है। इस मामले के सामने आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उचित कार्रवाई का आदेश दिया और रिपोर्ट मांगी है। वहीं, बीएसएफ ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इन सबके बीच हरिभूमि आपको बता रहा है पाकिस्तान और भारत के अलावा किस देश के सैनिक को कैसा भोजन परोसा जाता है...
देश की सरहद की रखवाली करने वाले हमारे फौजियों को घटिया खाना परोसा जाता है। ये खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में हुआ है। सीएजी (कैग) की रिपोर्ट में सामने आया है कि पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनात भारतीय सेना के जवानों को ताजा खाना नहीं दिया जाता है। साथ ही ये भी खुलासा हुआ है कि फौजियों को भरपेट भोजन भी नहीं मिलता है।
भूखे रहने को मजबूर जवान
कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान और चीन के बॉर्डर पर तैनात फौजियों को ताजा खाना नहीं दिया जाता है। साथ ही यह भी खुलासा हुआ है कि इन फौजियों को भरपेट खाना भी नहीं मिलता है।
ऐसी है खाने की गुणवता
कैग का कहना है कि खुद सेना द्वारा कराए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि फौजियों को घटिया खाना परोसा जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 68 फीसदी जवान परोसे गए खाने को संतोषजनक या फिर घटिया मानते हैं। रिपोर्ट में सामने आया है कि सैनिकों को निम्न-गुणवता का मांस और सब्जी खाने को दी जाती है। साथ ही राशन की मात्रा भी कम दी जाती है और जो राशन दिया जाता है वो स्वाद अनुसार भी नहीं होता है।
रक्षा मंत्रालय पर उठे सवाल
कैग ने अपनी रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्मी हेडक्वॉर्टर द्वारा तैयार किए गए राशन-एस्टीमेट को रक्षा मंत्रालय ने 20-23 प्रतिशत तक कम कर दिया। जबकि सेना ने ये राशन फिल्ड-एरिया में तैनात बटालियन और रेजीमेंट्स की वास्तविक खाद खाद्य क्षमता और उपलब्ध स्टॉक के आधार पर तैयार किया था।
इन आंकड़ों से समझिये मामला
रिपोर्ट में उदाहरण के तौर पर कहा गया है कि जहां कमांड मुख्यालयों ने 2013-14 में मात्र 3199 मैट्रिक टन चाय की पत्ती की मांग की थी, डीजीएसटी ने उस मांग को खुद बे खुद बढ़ाकर 2500 मैट्रिक टन कर दिया। वहीं, कमांड्स ने जब 2014-15 में करीब 46 हजार मैट्रिक टन (45,752) दाल की मांग की थी, तो डीजीएसटी ने उसे घटाकर 37 हजार मैट्रिक टन कर दिया। रिपोर्ट में ये भी खुलासा हुआ है कि सेना को ब्रांडेंड आटा तक नहीं मिलता है।
अमेरिका- चीन और भारत-पाकिस्तान का रक्षा बजट
अमेरिका अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा सैन्य क्षमका की आधुनिकीकरण पर खर्च करता है। अमेरिका अपनी सेनाओं पर 612 बिलियन डॉलर खर्च करता है, जो कई देशों की सकल अर्थव्यवस्था से भी ज्यादा है। वहीं चीन की सेना के बारे में दुनिया ज्यादा नहीं जानती। इसीलिए वो चीन से खौफ भी खाती है। चीन ने पिछले साल के मुकाबले इस बार अपनी सेना के बजट में 12.2 फीसदी की बढ़ोतरी की है। जो कि मौजूदा समय में 126 बिलियन डॉलर है। नि:संदेह भारत की सैन्य क्षमता भी काफी मजबूत है। हालांकि भारत अपने बजट का काफी छोटा हिस्सा ही सेना पर खर्च करता है। मौजूदा समय में भारत का सैन्य बजट महज 46 बिलियन डॉलर का है, जोकि अधिकतर तकनीकी को हासिल करने में खर्च हुआ है। वहीं पाकिस्तान सरकार ने देश का रक्षा बजट 11 प्रतिशत बढ़ाकर 860 अरब रुपये कर दिया है जो पिछले साल 776 अरब रुपये था।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story