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सोहराबुद्दीन कौन था : जानें हर वो बात जो आपको पता होनी चाहिए

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत हिस्‍ट्रीशीटर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर शेख और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में शुक्रवार को फैसला सुना दिया है।

सोहराबुद्दीन कौन था : जानें हर वो बात जो आपको पता होनी चाहिए

केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation) की विशेष अदालत हिस्‍ट्रीशीटर सोहराबुद्दीन शेख (sohrabuddin sheikh), उसकी पत्नी कौसर शेख और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में शुक्रवार को फैसला सुना दिया है। सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है।

सोहराबुद्दीन कौन था ? (Sohrabuddin Biography In Hindi)

हिट्रीशीटर सोहराबुद्दीन शेख मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के झिरन्या गांव का रहने वाला था। सोहराबुद्दीन शेख की मां सरपंच और उसके पिता जनसंघ के पूर्व सदस्य थे। सोहराबुद्दीन के साथी उसे वकील कहकर बुलाते थे।

बताया जाता है कि युवा होते ही सोहराबुद्दीन शेख ने जरायम (जुर्म) की दुनिया में कदम रखा था। सोहराबुद्दीन शेख के घर से साल 1995 में 40 एके-47 राइफल बरामद की गई थी।

उस दौरान सोहराबुद्दीन शेख के खिलाफ अवैध हथियारों की तस्करी का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद सोहराबुद्दीन शेख पर गुजरात और राजस्थान के व्यापारियों से जबरन वसूली और हत्या के कई मुकदमें दर्ज हुए।

गुजरात पुलिस के मुताबिक सोहराबुद्दीन के संबंध अंडवर्ल्‍ड डॉन दाउद इब्राहिम के साथियों और लश्‍कर-ए-तोइबा व पाकिस्‍तान के आईएसआई से थे। 6 दिसंबर 1992 में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया। इसके बाद आतंक फैलाने के लिए अब्‍दुल लतीफ ने पाकिस्तान के करांची में अंडवर्ल्‍ड डॉन दाउद इब्राहिम के गुर्गे छोटा दाउद उर्फ शरीफ खान से भारी संख्या में हथियार मंगवाए थे।

इन हथियारों को सोहराबुद्दीन ने रउफ नामक एक अन्‍य व्‍यक्ति के साथ मिलकर अहमदाबाद से अपने गांव पहुंचकर कुएं में छिपा दिया था। गुर्गे छोटा दाउद उर्फ शरीफ खान के लिए ही सोहराबुद्दीन राजस्‍थान के मार्बल व्यापारियों से वसूली किया करता था।

इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने सोहराबुद्दीन सहित लगभग 100 लोगों को आरोपी बनाया था। सोहराबुद्दीन शेख के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) उसके एनकाउंटर को फर्जी साबित करने में लगी रही।

इसके लिए कांग्रेस ने केंद्रीय जांट ब्यूरो (सीबीआई) का गलत इस्तेमाल तक किया। साल 2010 में इसी मुकदमे में नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी गुजरात के तत्‍कालीन गृह मंत्री अमित शाह को गिरफ्तार किया और राजस्‍थान के तत्‍कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया से इस संबंध में पूछताछ की गई थी। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में साल 2007 में पूर्व DIG डीजी बंजारा सहित कई वरिष्‍ठ पुलिस अफसरों को गिरफ्तार किया गया था।

कैसे हुआ सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर?

26 नवंबर 2005 को गुजरात के अहमदाबाद सर्किल और विशाला सर्किल के टोल प्वाइंट पर सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी का एनकाउंटर कर दिया गया।

सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी और उनके साथी तुलसीराम प्रजापति हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे। इसी दौरान उनके वाहन को आतंकवाद निरोधी दस्ते ने रूकवाकर उन्हें बाहर निकाला।

आतंकवाद निरोधी दस्ता दोनों को अहमदाबाद के एक फार्महाउस में ले जाया गया। जहां उनको मार दिया गया। इस एनकाउंटर में गुजरात के एटीएस चीफ डीजी वंजारा और राजस्थान पुलिस के तत्कालीन एसपी एमएन दिनेश ने अहम भूमिका निभाई थी।

अखबारों की सुर्खियां बनी

जिस दिन सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर किया गया था। उसके अलगे दिन अखबरों कि सुर्खियां थी के लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई का आतंकी मारा गया। गुजरात पुलिस के मुातबिक सोहराबुद्दीन एक खूंखार आतंकी था और गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को मारने की फिराक में था।

सोहराबुद्दीन पर ये थे आरोप

* गुजरात पुलिस के मुाताबिक सोहराबुद्दीन का संबंध ISI और लश्कर-ए-तैयबा से था।

* सोहराबुद्दीन नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश रच रहा था।

* सोहराबुद्दीन के घर 40 AK-47 राइफल जब्त की गई।

* सोहराबुद्दीन गुजरात और राजस्थान के मार्बल व्यापारियों से वसूली करता था।

* सोहराबुद्दीन पर हत्या अवैध हथियारों की तस्करी।

कोर्ट ने आरोपियों को किया बरी

जानकारी के लिए आपको बता दें कि शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत सोहराबुद्दीन शेख, उसकी बीबी कौसर शेख और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में आज फैसला सुनाया।

कोर्ट ने सभी 22 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हत्या को साबित करने के लिए गवाहों का बयान संतोष जनक नहीं है। इसलिए सभी 22 आरोपियों बरी कर दिया जाता है।

यह मामला 13 साल पुराना है। इस मामले में कई गवाहों, आरोपियों और जांचकर्ताओं ने कहा है कि उन्हें घटना पूरी तरह से याद नहीं है। इस मामले की सुनवाई में उस समय नया मोड़ आ गया था जब एक जांचकर्ता ने कह दिया कि यह मुठभेड़ फर्जी थी और तीनों की हत्या हुई है।

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