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टाटा को झटका: 12 हफ्तों में किसानों को वापस होगी सिंगूर की जमीन

टाटा ने मामले को 5 जजों की संवैधानिक पीठ को भेजे जाने की मांग की थी।

टाटा को झटका: 12 हफ्तों में किसानों को वापस होगी सिंगूर की जमीन
नई दिल्ली. बंगाल की राजनीति में कम्युनिस्टों को तीन दशक पुरानी सत्ता से बेदखल करने वाले सिंगूर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह सिंगूर की जमीन को अपने कब्जे में ले और किसानों को 12 हफ्तों के भीतर वापस करे।
2006 में पश्चिम बंगाल सरकार ने टाटा मोटर्स को नैनो प्लांट लगाने के लिए जमीन दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि जिन किसानों को मुआवजा मिल गया था उन्हें लौटाना नहीं होगा क्योंकि वे पिछले एक दशक से अपनी जीविका से महरूम थे।
जानिए इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ
* 18 मई, 2006: तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और रतन टाटा ने सिंगूर में नैनो प्रोजेक्ट का ऐलान किया
* 20 सितंबर 2006: राज्य सरकार ने जमीन अधिग्रहित की
* 28 दिसंबर 2006: ममता बनर्जी ने 25 दिन की भूख हड़ताल खत्म की
* 9 मार्च 2007: टाटा ने जमीन पर कब्जा लिया
* 10 जनवरी 2008: नई दिल्ली में ऑटो शो में नैनो का प्रदर्शन किया
* 18 जनवरी 2008: कलकत्ता हाईकोर्ट ने अधिग्रहण को सही ठहराया
* 3 अक्तूबर 2008: रतन टाटा ने प्रोजेक्ट वापस लिया
* 13 मई 2011: तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में चुनाव जीता
* 9 जून 2011: ममता बनर्जी ने सिंगूर जमीन वापस लेने के लिए विधेयक लाने की घोषणा
* 13 जून 2011:विधानसभा में सिंगूर बिल पास किया
* 20 जून 2011: राज्यपाल ने बिल पर हस्ताक्षर किए
* 21 जून 2011: सरकार ने सिंगूर जमीन को वापस लिया
* 22 जून 2011: टाटा मोटर्स ने सिंगूर एक्ट को कोलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी, मामले पर रोक लगाने की मांग की।
* 27 जून 2011: हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इंकार किया, टाटा ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया
* 28 जून 2011: जमीन का सर्वे शुरू हुआ, कागजात सरकार को वापस किए गए
* 29 जून 2011: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को किसानों को जमीन वापस ना करने के आदेश दिए
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